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कामी तरि, क्रोधी तरै, लोभी तरै अनन्त आन उपासी कृतधनी, तरै न गुरु कहन्त संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि कामी और क्रोधी तर सकते हैं और लोभी भी इस भव सागर से तरकर परमात्मा को पा सकते हैं पर जो अपने इष्ट देव की उपासना त्यागता है और गुरु का संदेश नहीं
देश की सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड की कार्य प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए हमेशा से ही सिर दर्द रही है। फिर भी ये देश के लोगों का सरकारी उपक्रमों के प्रति लगाव ही है जो इन्हें चलाता रहता है। कोई जानता है कि इन नवरत्नों, महा
डा०आशुतोष शुक्ल
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स्वाभिमान
शहर की भीड़भाड़ से उकताया हुआ कुत्ता जंगल की ओर चल दिया. बस्ती से बाहर आते ही उसकी निगाह एक औरत पर पड़ी, सिर पर लकड़ियों का बड़ा-सा गट्ठर उठाए वह शहर की ओर जा रही थी. गट्ठर भारी होने के कारण उसे चलने में परेशानी हो रही थी. ‘इतना कठिन जीवन जीने वाला मनुष्य
kashyap omprakash
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प्रमाणश्चधिकश्यापि महत्सत्वमधष्ठितः। पदं स दत्ते शिरसि करिणः केसरी यथा।। हिंदी में भावार्थ- प्रमाणित योग्यता से अधिक पद की इच्छा करने वाला व्यक्ति भी उस महापद पर विराजमान हो जाता है उसी प्रकार जैसे सिंह हाथी पर अधिष्ठित हो जाता है। उच्चेरुच्चस्तरामिच
रचनाकार परिचय:-सुभाष नीरव का जन्म 27–12–1953 को मुरादनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक तथा भारत सरकार के पोत परिवहन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी(प्रशासन) के तौर पर कार्यरत सुभाष नीरव की कई कृतियाँ यथा ‘यत्कचित’, ‘रोशनी की लकीर’
साहित्य-शिल्पी
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canada se --
चल दिए-- आसमां से-- बादलों के ऊपर -- ये जमीं है या आसमां-- लो भाई पहुँच गए ---
Dr.T.S. Daral
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उस गुजरे हुए ज़माने की कोई बात सुनाए | .................................दर्द की याद दिलाए | चितौड़ दुर्ग ने शाके देखे , रक्त सिन्धु रण खेत हुए थे | कौन स्मृति चिन्ह को लेकर , मेरे तिलक लगाए | .......................................फूलों के हार चढ़ाए |
क्षत्रिय
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मानसून की आस में प्यासी धरती की तड़प आसानी से समझी जा सकती है। सभ्यता के आदि काल से ही वर्षा पर निर्भरता ने इसे आमंत्रित और नियंत्रित करने हेतु मनुष्यों को प्रेरित किया है। वर्षा के देवता की आराधना तथा यज्ञ के अलावे संगीत को भी वर्षा को आमंत्रित करने
धत तेरे की। ये भी कोई एक्सपेरीमेन्ट हुआ। इंसान ही को इंसान बनाकर दिखा दो तो जानें।’’ रामसिंह ने फिलास्फी झाड़ी। ‘‘पहले मैं जानवरों पर एक्सपेरीमेन्ट कर रहा हूं। फिर इंसानों की बारी आयेगी।’’ प्रोफेसर ने बताया। ‘‘ये इस डोंगे में क्या है?? बड़ी बदबू आ रह
zeashan zaidi
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आजकल के मौसम के हिसाब से एक बेहतरीन पेय बताता हूँ. मजेदार, स्वास्थवर्धक और बहुत कम कैलोरी.स्मूथीसामग्री: (दो गिलास के हिसाब से)१० स्ट्राबेरी१०-१२ काले अंगूर१ गिलास दही६ काजू६ अखरोट के आधे टुकड़े६ बादाम१ चम्मच शक्करस्ट्राबेरी और अंगूर को चॉपर में ग्रेट
जुलाई 2009 को हरिभूमि समाचार पत्र के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग की दुनिया से' में इंडियागेट न्यूज, हिंदी टीवी मीडिया तथा इंडियन सिटिज़न का उल्लेख
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ए/ए1/एच1/ विषाणु के कारण होनेवाले सूअर बुखार (स्वाइन फ्लू) को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए विश्वव्यापी महामारी (पैंडेमिक) के स्तर के जोखिम की संभावना वाली स्थिति माना है (देखिए चित्र)। यह बुखार मेक्सिको में सर्वप्रथम प्रकट हुआ
बालसुब्रमण्यम
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कैसे जानें आपके बच्चे का हुआ है यौन शोषण? यद्यपि सबसे अच्छा तो यही है कि बच्चा इसके बारे में स्वयं ही बताए, मगर बच्चे के लिए अपनी व्यथा व्यक्त करना आसान नहीं होता है। इसलिए कई बार बच्चे के व्यवहार में आए परिवर्तनों को देखकर ही अन्य लोगों को समझ लेना
बालसुब्रमण्यम
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निमन्त्रण
कितना अजीब है ! मिलना निमन्त्रण भूतपूर्व पत्नी की शादी पर !! जैसे कि याद दिला दिया उसने कैसे कैसे स्वप्न थे मेरे ! कि पत्नी भी बन पाये प्रेमिका पर छोड़ो यार ! कहाँ की लजाती मुस्कान और शौख अदाये! नहीं बन पाई थी वह रूक्मणी से राधा ! देना पड़ा था तलाक क्य
मुंह दिखाई के समय दूल्हन का घूंघट हटा कर जैसे ही जलेबी फूवा ने मुंह देखा, चौंक कर पीछे हट गईं - हाय दईय़ा....दुल्हन को तो दाढी-मोंछ है। कौन गांव की ले आया रे........अरे नासपीटे..........तैने ईतना भी पता न चला कि लडके को ही दुल्हन बना कर ले आया। तभी मै
सतीश पंचम
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ते रापन्थ के आध-पुरुष स्वामी भिखणजी एक सत्य- सधायक एवम सिद्धान्तनिषठ आचार्य थे। स्वामीजी एक उत्सकृष्ठ सन्त थे। उनकी उत्सकृष्ठता का मूल कारण था आचार और विचार विषयक विशुद्धि की पुर्ण जागरुकता. आचार्य भिक्षु के बारे मे बहुत ग्रन्थ लिखे गये । पर अनलिखा ब
अरे भैया, अलेक्जेंडर द ग्रेट को क्यूं बदनाम करते हो। अब उसकी क्या ग़लती थी। बेचारे की आत्मा बहुत बद्दुआ दे रही होगी। ज़िंदा था तो किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उसके ख़िलाफ एक लाईन भी बोल दे। अब मरने के करीब दो हजार साल बाद उसे गे घोषित कर दिया। ब्रांड ए
Rajiv K Mishra : Roam-antic Realist
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परबतिया के माई और बाउ प्रसंग का अंत इसके बाद वाली पोस्ट में होगा । हालात कुछ ऐसे हो गए कि यह पोस्ट ठेलनी पड़ी। मूढ़ इतना मूरख नहीं कि समय के अनुसार न बदले। वैसे भी कथा और व्यथा वाचन में तारतम्य रहे तो लंठ आम ब्लॉगरों से अलग कैसे कहाएगा? अतएव इस कथा क
गिरिजेश राव
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इधर आटो रिक्शाओँ के अध्ययन में जुटा, तो कई ज्ञान की बातें मालूम पड़ीं। एक आटो के पीछे लिखा था-फिर मिलेंगे। ऐसा अकसर होता है आटो वाले से पूछें कि अलां कालोनी चलोगे, तो वह बताता है कि नहीं, वह तो फलां कालोनी जा रहा है, और चला जाता है, संदेश देकर फिर [.
क्षितिज
क्षितिज अपूर्व तुम्हारा मिलन है तुम भरमाते आह्लादित करते और मन को एक सहारा देते कि मिलते हैं पृथ्वी और आकाश। तुम्हारा मिलन एक असत्य सत्य है, तुम्हें न दिन लिहाज न रात का डर है अपूर्व तुम्हारा मिलन है।
उषा वर्मा
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प्रगति
बहुत दूर से चली आ रही हूँ ये सोच कर चल रही हूँ, कि कभी न कभी, घर आएगा जी उछल जायेगा, मन मुस्काएगा, थके तन और मन, दोनों को मिलेगी एक थाह, सुस्ताने की अब प्रबल हो गयी है चाह, पर घर है कि आता ही नहीं है, बोझ थकन का मन से जाता ही नहीं है, बिना रुके लगाता
गुम्बद के लिए अंग्रेजी का डोम शब्द हिन्दी के लिए जाना पहचाना है। सभ्यता के विकासक्रम में डोम मूलतः आश्रय था। स हकामी सुमिरन करै, पावै उत्तम धाम, निहकामी सुमिरन करै, पावै अविचल राम आ श्रय के अर्थ में भारतीय मनीषा में धाम शब्द का बड़ा महत्व है। धाम का
अजित वडनेरकर
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मेरी जंगल डायरी से कुछ पन्ने-31 - पंकज अवधिया इमली मे काली साडी वाली चुडैल, जिद्दी बैगा और जनविश्वास “रात के दो-सवा दो बजे थे। जगदलपुर से निकलते समय ही मुझे देर हो गयी थी। सडक पर कम गाडियाँ थी। काँकेर के पास ढाबे मे रुककर चाय पी और मुँह मे पानी के छी
पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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करीब तीन महीने पहले केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की प्रेस कान्फ्रेंस में जूता फेंकने वाले पत्रकार जरनैल सिंह को उनके संस्थान दैनिक जागरण ने बर्खास्त कर दिया है । दैनिक जागरण प्रबंधन की तरफ 30 जून को भेजे बर्खास्तगी के पत्र के साथ उनका हिसाब कर दिय