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स्वाधार चैतन्य ही समाधि है
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12-May-2008 04:39 AM
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'ईश्वर है?'- हमें ज्ञात नहीं।'आत्मा है?'- हमें ज्ञात नहीं।'मृत्यु के बाद जीवन है?'- हमें ज्ञात नहीं।'जीवन में कोई अर्थ है?'- हमें ज्ञात नहीं।'हमें ज्ञात नहीं' यह आज का पूरा जीवन-दर्शन है। इन तीनों
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नर्गिस बनाम बुश
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12-May-2008 04:34 AM
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मसला विकट सीरियस है। यूं इस मसले पर आपत्ति संजय दत्तजी को करनी चाहिए थी। पर उनकी मान्यता यह है कि खुद को चिरकुटई के इतने कामों में उलझा लो कि जेल जाने की नौबत आ जाये, फिर जेल से रिलीफ मिलने
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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को भूली सरकार
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12-May-2008 04:05 AM
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विदेशियों के शासन के खिलाफ 1857 में शुरू हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को 150 साल खामोशी के साथ पूरे हो गए। 1857 में भड़की आजादी की पहली लड़ाई के 150 वें वर्ष की शुरूआत में तो कई कार्यक्रमों का आयोजन
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पानी की एक बूँद !
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12-May-2008 04:03 AM
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चिलचिलाती धूप दूर तलक झिलमिलाते सूखे पेड़ और फैली वीरानियां सूखे तिनके भी तड़प उठते हैं कड़कते हुए
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मिठास का कानून
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12-May-2008 03:15 AM
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संस्कृत के खण्डः शब्द की बड़ी व्यापक पहुंच है। इससे मिलती जुलती ध्वनियों वाले कई शब्द द्रविड़ , भारत-ईरानी , सेमेटिक और यूरोपीय भाषाओं में मिलते हैं। क ख ग वर्णक्रम में आनेवाले ऐसे कई शब्द इन तमाम
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हैंडल द चिल्ड्रन विद `टीपी´ एंड `बीके´
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12-May-2008 01:31 AM
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`बचपन के दिन भी क्या दिन थे...´, `बचपन हर गम से बेगाना होता है...´, `नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए...´ `लकड़ी की काठी, काठी का घोड़ा, घोडे़ की दुम पर जो मारा हथौड़ा...´ सरीखे गीत वयस्कों ही नहीं,
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डिस्टलरी की बदबू और कडवी प्रार्थना का दौर रायपुर मे
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12-May-2008 01:27 AM
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आज रात दस बजे पहली बार डिस्टलरी की बदबू पूरे शहर मे फैली और फिर अब रात एक बजे एक बार फिर सेप्टिंक टैंक जैसी बदबू फैलने लगी है। कूलरो और दूसरे माध्यम से यह घरो के अन्दर तक पहुँच तो जाती है पर फिर
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वांगी भात
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12-May-2008 01:23 AM
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अक्सर विवाह समारोहों में यह व्यंजन बनाया जाता है और खूब चाव से खाया जाता है ।घर में भी आप इसे काफी आसानी से बना सकते हैं । पर सुनने के लिये तैयार रहिये किशादी वाले वांगी-भात का मजा नही आया । नही नही
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दाल रोटी चावल
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Mrs. Asha Joglekar
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हैप्पी मदर्स डे
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12-May-2008 01:17 AM
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अमेरिका मे आज मातृ दिन है । आप सबको बहुत शुभ कामनाएं । माँ होने के दो महत्वपूर्ण पहलू होतेहैं । पहला है बिना शर्त असीम प्यार और दूसरा बच्चे की जरूरतें समझ कर उन्हें पूरा करना और इसके लिये कुछ भी कर
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आत्मिक सुख पहुंचाने वाला शुकताल...
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12-May-2008 01:03 AM
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अपने रिश्तेदारों के साथ इसी महीने गंगा स्नान के लिए जाने का मौका मिला.यूं तो हम हर साल ही मई माह में गंगा स्नान के लिए जाते हैं,लेकिन इस बार जैसा आत्मिक सुख और आनंद कभी नहीं मिला.दरअसल हम लोग हर साल
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विश्वास
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12-May-2008 12:38 AM
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जब भी तूफान आता हैवह पेड़ सिहर उठता हैउसे मालूम हैकि उसकी जड़ेंकितनी अंदर हैं...बरगद नहीं गुजरा कभी ऐसे डर सेक्योंकिटहनियों से भीजड़े उसनेटाँगी है.....ऐसा भी तूफान हैजब बरगद भीउखड़ जाता है....पर डरने
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मिलिंद खांडेकर के पिता का निधन
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12-May-2008 12:21 AM
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इस समय स्टार न्यूज से और उससे पहले आज तक और महानगर और नवभारत टाइम्स से जुडे मिलिंद दक्षिण दिल्ली के सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया में रहते हैं। उनके माता-पिता इंदौर से दो दिन पहले ही आए थे। वो इंदौर में
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मौन और संगीत
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12-May-2008 12:04 AM
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क्या होता संगीत मौन में पूछ रहे क्या कोलाहल से।समय ने जो भी घाव दिए हैं कहां धुले हैं वो दृगजल से। अपने मन में हमने हरदम बैर-भाव ही तो पाले हैं।फूट रहे हैं जो इस जग में वो अपने ही तो छाले हैं।देख के
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कबाङखाना
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विकास परिहार
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सस्ता शेर
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Ashok Pande
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वृद्धों की सेवा में परमानंद
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12-May-2008 12:00 AM
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वृद्ध स्वयं भी हैं, औरों के लिये तन-मन-धन से संलग्न हैं वे। ऐसे लोग मिलते कहां हैं जो दूसरों के लिये जीते हों। लेकिन पेशे से चिकित्सक डा. रमाशंकर आज से नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से चिकित्सा समाज
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वृद्धग्राम
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harminder singh
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मां
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11-May-2008 11:55 PM
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मुंबई11 मई 2008इतवार की सुबह सबेरे छह बजे उठना हो, तो ऐसा लगता है कि मानो काला पानी की सज़ा भुगतनी पड़ रही है। लेकिन पिछले करीब नौ महीनों से अगर खादिम मोहल्ला की गलियों में आबपाशी नहीं कर पाया, तो
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क़ासिद
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पंकज शुक्ल
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हमारा रेफ्रीजिरेटर चोर है!
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11-May-2008 11:50 PM
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श्रीमती जी को सोने की लत है। रात के ९ बजे नहीं कि वह गड़प! अपन ठहरे निशाचर! रात-रात कम्प्यूटर पर बैठे रहेंगे या कोई किताब पढ़ते रहेंगे.लेकिन बात किताब book या निशाचरी की नहीं है। बात है रेफ्रीजिरेटर
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आज़ाद लब
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विजयशंकर चतुर्वेदी
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क्या हो हमारा कर्तव्य ?
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11-May-2008 11:26 PM
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हम सभी स्त्रियां समूचे नारी वर्ग की चिन्ता में घुली जा रही हैं. जिसे देखो, जहां देखो, एक ही डिस्कशन,नारी जाति का उत्थान कैसे हो? नारी उत्पीडन कैसे बन्द हो? समाज में नारी को बराबरी का हक कैसे दिलाया
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नारी
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Ila's world, in and out
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कौवा की आएगी बारात...पर ज़रा देर लगेगी यार
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11-May-2008 10:46 PM
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एक हमारे कौवा दोस्त हैं.....दरअसल नाम तो कुछ और है..लेकिन उन्हें हम लोग कौवा कहते हैं...कौवा इसलिए क्योंकि उनका रंग काला है....वैसे मैं कहीं से भी उनके नाम के साथ हुए इस षडयंत्र का हिस्सा नहीं
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मेरा कोना
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archana rajhans
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क्राइम डायरी
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राजेश कुमार
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PM's seat and Sholay
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11-May-2008 10:06 PM
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चुनाव की सुगबुगाहट फिर फ़िज़ाओं में है। कांग्रेस की तरफ से प्रधान मन्त्री के पद के दावेदार के नाम के विषय में एक बार फिर अटकलें लग रहीं हैं।पिछले चुनाव में आखिरी दिन तक सोनिया जी प्रधान मन्त्री की पद
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राजा और किले का किस्सा - शिरीष कुमार मौर्य
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11-May-2008 09:49 PM
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यह कविता 14 मई 1994 की रात लगभग बौखलाहट में लिखी, जब समाचार में सुना कि उमेश डोभाल के हत्यारे को सी0बी0आई0 की विशेष अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया है। इस कविता के कुछ पोस्टर भी बने और उत्तराखंड के कुछ
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कबाड़खाना
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शिरीष कुमार मौर्य
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एक मुलाक़ात
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11-May-2008 09:19 PM
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एक कार्यक्रम के सिलसिले में मुझे उषा राय से मुलाक़ात करने का मौका मिला। जी हाँ वही उषा राय जिनका नाम उन महिला पत्रकारों में शामिल है जिन लोगों ने साठ के दशक में पत्रकारिता में महिलाओं को एक मुक़म्मल
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आईना
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प्रियम्बरा
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हम मदर्स डे को मां दिवस क्यों नहीं कह पाते
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11-May-2008 09:03 PM
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बात वहीं से शुरू करते हैं जहां सुबह छोड़ी थी। बदलाव एक दोधारी तलवार है। चाहे हमारा अपना जीवन हो, हमारा समाज हो या फिर हमारा देश, हम हमेशा बदलावों को लेकर आशंकित होते हैं, असुरक्षित महसूस करते हैं।
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भदेस भारत
में
भुवन भास्कर
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चार धाम (रामेश्वरम्)
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11-May-2008 08:31 PM
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रामेश्वरम् हिंदुओं का पवित्र तीर्थ है। रामेश्वरम् चेन्नैइ से कोई सवा चार सौ मील दक्षिण-पूरब में है। रामेश्वरम् एक सुन्दर टापू है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी इसको चारों ओर से घेरे हुए है। इस
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दर्द हिन्दुस्तानी को Pain हिन्दुस्तानी बनाया
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11-May-2008 08:17 PM
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आपने सही पढा अब गूगल बाबा हिन्दी से अंग्रेजी अनुवाद जो करने लगे है। गाजर घास और भ्रष्टाचार नामक मेरी हिन्दी कविता का अंग्रेजी शीर्षक दिया गया है Grass and Carrots corruption. इसी मे नीचे दर्द
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मेरी कविता
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पंकज अवधिया Pankaj Oudhia
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