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लागिन : पासवर्ड :  
बहुत दिनों बाद थियेटर में अकेले कोई फ़िल्म देखी. बहुत दिनों बाद थियेटर में रोया. बहुत दिनों बाद यूँ अकेले घूमने का मन हुआ. बहुत दिनों बाद लगा कि जिन्हें प्यार करता हूँ उन्हें जाकर यह कह दूँ कि मैं उनके बिना नहीं रह पाता. माँ की बहुत याद आयी. रिवोली से
मे एक बार फिर से नई खूबी। अब Gmail पहले की तरह ही एक ही ढंग का नही दिखेगा क्योकिं आज ही Gmail मे ३० नए theme डाल दीये गये है। जैसा orkut मे हुआ था ठीक वैसा ही। पर अभी ये theme वाला option सभी के उपलब्ध नही पर जल्द ही सबके लिए खुल जाएगा। एक झलक उन The
Ankit
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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक निर्णय में हरियाणा के निजी बीएड कालेज संचालकों को बीएड दाखिले में राहत दी है। इसके तहत प्रदेश के निजी बीएड कालेज संचालकों से हर हाल में 28 नवम्बर तक दाखिला प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस टीएस ठाकु
लोकेश
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ब्ला ग दुनिया में एक खास बात पर मैने  गौर किया है। ज्यादातर  ब्लागरों ने अपने प्रोफाइल  पेज पर खुद के बारे में बहुत संक्षिप्त सी जानकारी दे रखी है। इसे देखते हुए मैं सफर पर एक पहल कर रहा हूं। शब्दों के सफर के हम जितने भी नियमित सहयात्र
अजित वडनेरकर
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हमारा देश सामाजिक विषमताओ से भरा हुआ है, नही जाति,धर्म और लिंग की विषमता ही नही एक और विषमता भी है । यहाँ पर क्रिकेट टीम का कप्तान तो अपने राज्य का सबसे ज्यादा टैक्स पेयर है और करोडो कमाता है, किंतु शायद फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान लाखो मे ही झूलते
चौं रे चम्पू! भावनान कूं रोकिबे कौ का उपाय ऐ? --चचा, मार दिया। पापड़ बेलने वाले बेलन की मूठ से। अब काम नहीं चलेगा झूठ से। दरअसल, भावनाएं इंसान की चेतना को इस कदर बेलती हैं कि उनके विस्तार को अस्तित्व की तंत्रियां बड़ी मुश्किल से झेलती हैं। लेकिन आप तो
बस यूं ही
एक महीने से ज्यादा हो गया। ब्लॉग पर कुछ लिख नहीं पाया, हालांकि इतना बिजी भी नहीं था कि कुछ लिख न सकूं। पर मुझे लगता है कि कई बार लिखने के क्रम में ऐसा ब्रेक लगता है कि सारी तारतम्यता बिगड़ जाती है। इतने दिनों में कई फिल्में देखीं, लैपटॉप ले लिया, दिव
इधर मेरी काहिली कुछ इस कदर बढ़ गयी है कि मेल आते रहे और मेरी निगाहें उन्‍हें बेबसी से देखती रहीं। फुर्सत और भागमभाग का ऐसा घोल मचा रहा है कि डीयू में प्राध्‍यापक, सोशल एक्टिविस्‍ट, कॉलमिस्‍ट और दोस्‍त, बड़े भाई अपूर्वानंद के जरूरी मेल भी आंखों से नज़
ढोल नगाड़ों की थाप शांत हो गई। नेता-कार्यकर्ता दोनों अब घर-घर जाकर लोगों को वोट देने के लिए कह रहे हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बड़े नेताओं की रैलियों में भीड़ नहीं जुटना कुछ खास संकेत दे रही है। यह संदेश उन नेताओं के लिए घातक हैं जो चुना
मृगेंद्र पांडेय
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मैं नहीं जानता कि दिन क्या है? मैं नहीं जानता कि रात क्या है? मैं ये भी नहीं जानता कि क्या सुबह, क्या शाम? मैं नहीं जानता रात के तारे-चांदनी? मैंने नहीं देखी सुबह की ओस? मैं नहीं जान सका कब उगा सूरज गुलाबी रंग में और कब ढल गया फ़िर वो गुलाबी रंग में?
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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कल एम.ए.-द्वितीय वर्ष की मौखिकी (वाइवा) चल रही थी... एक लडकी आयी। चल नहीं पा रही थी। थोडी देर में अपनी साथी प्राध्यापिकाओं की बातों से समझ में आ गया कि गर्भवती है। ऐसे में मैं हर स्त्री के चेहरे पर ‘कामायनी’ के श्रद्धा वाले वर्णन का सच जाँचने लगता हू
satyadev tripathi
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मेरठ मे हुए दोहरे ह्त्या काण्ड की गुत्थी पुलिस कब सुलझा पाएगी या अरुशी हत्या कांड की तरह फाइल बंद हो जायेगी पता नही । मीडिया जिस तरह दोनों लड़कियों का चेहरा दिखा रहा हैं क्या वो सही हैं ? क्या आप को लगता हैं की लड़किया सेक्सुअल और चाइल्ड अब्यूज का शि
रचना
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कुछ नहीं कुछ भी नहीं कहना है बस्स.... सुनना है ! सुनना है !! सुनना है !!! इस आवाज के महीन , मद्धम ,मादक रेशे से खास अपने निज के एकान्त के वास्ते सदियों से सँभाल कर सहेजे गए करघे पर एक अदॄश्य चादर बुनना है ! कुछ नहीं कुछ भी नहीं कहना है !!!
रोज की डायरी : 2 जिन्दगी जैसे फास्ट फारवर्ड सी गुजर रही हो सामने से इतना कदमताल ठोकने के बाद भी कदमों ने जैसे जिद ठान ली हो साथ ना देने की ... बेलगाम आटो दिमाग को लगाम लगाता सरपट भागा जा रहा था, सीधे पुलिस लाईन के सामने जा कर धप से रूका फिर वही–सीन ज
अरूणा राय
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आज पहली वर्षगांठ की पूर्व संध्या है। कल साल गिरह होगी अनवरत की। एक साल, महज एक साल कोई लंबा अर्सा नहीं होता लेकिन लगता है कि बहुत-बहुत दूर निकल आया हूँ। इतनी दूर कि वह छोर जहाँ से चला था, नजर नहीं आता, या किसी धुंध में छिप गया है। आगे आगे चलता हुआ नज
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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जितेन्द्र जी, कृपा इस बात को स्पष्ट करें कि: 1.क्या यह बात सही है कि उत्कल में मारवाड़ी युवा मंच ने किसी इन्सुरेन्स कम्पनी के साथ व्यापारिक समझौता किया है। यदि किया है तो इसकी वास्तविकता क्या है? 2. क्या आपने किसी प्रकार की ट्रस्ट डीड बना रखी है? यदि
Shambhu Choudhary
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जो लोग अपनी खुद की रचनाओं को रिकॉर्ड कर ब्लॉग्स में डालते हैं, कृपया मेरी मदद करें और मुझे वेबसाइट्स की जानकारी सहित पूरा प्रक्रिया समझाएं। मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा। सहयोग की उम्मीद करता हूं
सच्चाइयाँ आज कहवाघरों में पस्त होते लोगों की बुदबुदाहटों में शेष हैं और न्याय को हर शख़्स भविष्य के गर्भ में उछाल रहा है और वर्तमान सिरे से गायब है समय के शमशान में मुर्दों का राज है और मैं किसी ठूँठ की कोटर से झाँकता उलूक हूँ नाख़ून को नैतिकता से बद
दिल्ली में दान.. लगभग एक महीने से ज्यादा होने को आया मुझे दिल्ली में। यहां की दौड़ती-भागती जिंदगी की अपने शहर चंडीगढ़ से तुलना करने के कोई न कोई मौका मिल जाता है। मयूर विहार समाचार अपार्टमेंट के पास की मार्केट में एक छोटा से ढाबा है। बिना छत्त के। बह
मनीषा भल्ला
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जल्दी से कर लो सिंगार बदल रहा तेवर यह आईना धीरे – धीरे बिछ रही है शीशे पर धूल उग रहे हैं इसमें बेर और बबूल कौन जाने आंख झपकाते ही हो जाये बंजर यह आईना जल्दी से कर लो सिंगार बदल रहा तेवर यह आईना आंखों में आंज लो काजर की रेख क्या पता निकाल दे कोई मीन –
महाराष्ट्र में नब्बे फीसदी जॉब स्थानीय लोगों (मराठियों) के पास हैं। यह कोई और नहीं,बल्कि महाराष्ट्र सरकार के आंकड़े बताते हैं। फिर भी यह कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में बाहरी लोग स्थानीय लोगों (मराठियों) से जॉब छीन रहे हैं। और इस पर पिछले कुछ समय से
सचिन मिश्रा
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रीता तिवारी कोलकाता. देश के सर्वाधिक साक्षर राज्यों में शुमार मिजोरम में समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होने के बावजूद राजनीति में उनकी हैसियत दूसरे राज्यों के मुकाबले बेहतर नहीं है। जहां महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बीस हैं, वहां
ambrish kumar
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मुंबई एटीएस को पुलित्जर पुरूस्कार मिल सकता हैं......अधिकारिक सूत्रों के हवाले से ये खबर दी जा रही है कि मुंबई कि आतंकवाद निरोधी शाखा को अगले वर्ष का पत्रकारिता के लिए पुलित्जर पुरूस्कार की घोषणा हो सकती हैं ......है न आश्चर्य की बात पर ये बात निश्चित
मिहिरभोज
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बेटे बेटी के लिये संजोये / क्या ह्सीन ख्वाबों में खोये / हर पिता वहीं को दौड रहा है /दिशा सपनों की मोड रहा है / शिक्षा की इस मंडी में / कोटा की तलवंडी में /धंधे का तूफान मचा है / इससे नहीं यहॉं कोई बचा है / उद्योग क्षेत्र सा विकसित है अब / पा के दाखि
प्रदीप मानोरिया
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