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यूँ ही अचानक...
देखा था तुम्हेंउगते सूरज कीनर्म उजली किरणों मेंमहसूस करा थातुम्हारा कोमल स्पर्शबारिश की रिमझिम फुहार मेंबच्चों की मासूमनिश्छल हँसी मेंसुना भी था तुम्हें, कई बारहाँ, इक बार आवाज़ दे कर बुलाया भी था सहर के वक़्त अज़ाँ में पर कभी सोचा ना थाचलते चलते अचानक इक
Jun 04 2010 02:42 PM



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