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मयखाने में "बंबई से आया मेरा दोस्त....."

हिंदी सिनेमा के शराबी गीत ( वाक़ई अंतिम गीत ) उन सभी मयखाना प्रेमियों के साथ सुनना चाहता हूँ ये मस्त-मस्त गीत जिन्होंने शराबी गीतों का यहाँ भरपूर मज़ा लिया ....गीत जिनका मज़ा लेने के लिए शराबी होना कतई ज़रूरी नहीं है !
 
मुनीश ( munish )
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जाने कहाँ गए वो घर.......

आजकल की फिल्मों में भी होते हैं घर मगर पता नहीं क्यों वैसे नहीं होते जैसे पहले की फिल्मों में होते थे ........ बिलकुल उत्तर भारत के किसी कस्बे के से ..किसी भी कस्बे के जिनमें अरहर की दाल और चावल , रोटी , सूखेआलू और खरबूज़ों की खुशबु वास करती हो । मिसाल
 
मुनीश ( munish )
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मयखाने में झूम बराबर झूम .....

सत्तर की दहाई में आई. एस. जौहर ने 'सी' ग्रेड की 'फाइव राइफल्स' नाम की एक फिल्म बनाई थी । फिल्म को लोग भूल गए मगर जिसने एक बार इस गीत को या कहूं अज़ीज़ नाज़ां की इस क़व्वाली को सुन लिया वो इसे कभी नहीं भूलेगा ऐसा मुझे लगता है , आपको क्या लगता है ?
 
मुनीश ( munish )
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'सरपत': इरफान के दोस्तों की फ़िल्म

इरफान और मेरा न सिर्फ़ धरम अलग है बल्कि डेट ऑफ़ -बर्थ भी अलग है । वो मई की तेरह को पैदा हुआ जबकि मैं चौदह को ! उसकी zen का रंग लाल है जबकी मेरी पर्ल- सिल्वर है । कच्छे-बनियान भी हमारे अलग-अलग कम्पनियों के हैं मगर ..मगर इन सब बुनियादी ना- इत्तेफाकियों
 
मुनीश ( munish )
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