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पिता और देवता

कैसा है ये भारत प्यारेकैसे इसके पुत्तरजो पिता और देवता मेंकरे फ़र्क भयंकरएक की मूर्ति बाहर रखेएक की मूर्ति अंदरकैसा है ये भारत प्यारेकैसे भारतवासीपिता-देवता रहे अलगजबकि वे सहवासीपिता-देवता दोनों देखोदोनों स्वर्गवासीकैसा है ये भारत प्यारेकैसे इसके बंदेजो
 
Rahul Upadhyaya
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मंदिर

मैं जब भी कभी मंदिर जाता हूँभगवान को वैसे का वैसा ही तटस्थ पाता हूँकर्मयोगी जो ठहरे!वही मुद्रावही भाव-भंगिमावही अधरो पे मुरलीऔरसाथ में वही राधाजो कृष्ण को छोड़मुझे देख रही हैंजो किअसम्भवअकल्पितऔरअसत्य हैइन्हीं सब बातों को ले करमैं हो जाता हूँ उनसे विमुखन
 
Rahul Upadhyaya
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