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वो लाश किसकी थी ? / त्रिपुरारि कुमार शर्मा

शाम का मंज़र... कितना खौफज़दा है । आसमान खून से तर है । ऐसा मालूम होता है किसी ने सूरज का कत्ल कर दिया है । शायद आखिरी साँस उफ़क की बाहों में लेना चाहता है । वह डूबता ही जा रहा है । पुरानी यादों की आहट दिल पर दस्तक दे जाती है । कुछ ज़ख्मी लम्हों का काफिला
 
त्रिपुरारि कुमार शर्मा
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