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चेहरे चमकदार, नीयत है काली-हिन्दी व्यंग्य कविता
दीनों के दीनानाथ हैं इंसान क्या मदद करेंगे। नाम लेकर भलाई का सारी रसद अपने घर भरेंगे। लूट लिया ज़माने का पैसा, हर लुटेरा लगने लगा अमीर जैसा, बना रहे हैं भीड़ को चलाने का कायदा, सुरक्षित रख रहे अपनी आने वाली पीढ़ी का फायदा, फैल गये गरीबों के हितैषी चारों
Apr 24 2010 06:53 PM



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