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हिन्दू धर्म संदेश-योग साधना से मन मजबूत होता है

प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य। हिन्दी में भावार्थ-प्राणवायु को बाहर निकालने और अंदर रोकने के निरंतर अभ्यास चित्त निर्मल होता है। विषयवती वा प्रवृत्तिरुपन्न मनसः स्थितिनिबन्धनी।। हिन्दी में भावार्थ-विषयवाली प्रवृत्ति उत्पन्न होने पर भी मन पर नियंत्रण
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चेहरे चमकदार, नीयत है काली-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीनों के दीनानाथ हैं इंसान क्या मदद करेंगे। नाम लेकर भलाई का सारी रसद अपने घर भरेंगे। लूट लिया ज़माने का पैसा, हर लुटेरा लगने लगा अमीर जैसा, बना रहे हैं भीड़ को चलाने का कायदा, सुरक्षित रख रहे अपनी आने वाली पीढ़ी का फायदा, फैल गये गरीबों के हितैषी चारों
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शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दिन भर वह दोनों ज्ञानी अपने शब्दों की प्रेरणा से लोगों को लड़ाने के लिये झुंडों में बांट रहे थे, रात को लूट में मिले सामान में अपना अपना हिस्सा ईमानदारी से छांट रहे थे। ——- शब्द रट लेते हैं किताबों से, सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से, पर
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हिंसक तत्वों के साथ मानवाधिकारों का प्रश्न-हिंदी लेख (With violent elements of human rights questions – Hindi article)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में