पसंद करें
2
नापसंद करें

वफदारी के दलाल-हिन्दी शायरी

हुक्मरानों ने तय कर दी सरहदें आम इंसानों का रास्ता रोकने के लिये, उनकी तन्ख्वाहों पर पलने वाले पहरेदार खड़े हैं आजादी से चलने वालों को टोकने के लिये। सिंहासन पर बैठने वाले चलते हैं उड़न खटोले में सांस लेते हैं मातहतों के टोले में, बेईमानों और दहशतगर्दों का
पसंद करें
1
नापसंद करें

हिन्दू धर्म संदेश-योग साधना से मन मजबूत होता है

प्रच्छर्दनविधारणाभ्यां वा प्राणस्य। हिन्दी में भावार्थ-प्राणवायु को बाहर निकालने और अंदर रोकने के निरंतर अभ्यास चित्त निर्मल होता है। विषयवती वा प्रवृत्तिरुपन्न मनसः स्थितिनिबन्धनी।। हिन्दी में भावार्थ-विषयवाली प्रवृत्ति उत्पन्न होने पर भी मन पर नियंत्रण
पसंद करें
0
नापसंद करें

चेहरे चमकदार, नीयत है काली-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीनों के दीनानाथ हैं इंसान क्या मदद करेंगे। नाम लेकर भलाई का सारी रसद अपने घर भरेंगे। लूट लिया ज़माने का पैसा, हर लुटेरा लगने लगा अमीर जैसा, बना रहे हैं भीड़ को चलाने का कायदा, सुरक्षित रख रहे अपनी आने वाली पीढ़ी का फायदा, फैल गये गरीबों के हितैषी चारों
पसंद करें
0
नापसंद करें

चाणक्य नीति दर्शन-खोखले बांस के पेड़ पर हवा प्रभाव नहीं डाल सकती

अंतःसारविहनानामुपदेशो न जायते। मलयाचलसंसर्गान् न वेणुश्चंदनायते।। नीति विशारद चाणक्य जी का मानना है कि मलयाचल पर्वत से प्रवाहित वायु देह के स्पर्श से ही सामान्य पेड़ भी चंदन जैसे सुगंधित हो जाते हैं। एक मात्र बांस का पेड़ ही खोखला होता है जिस पर कोई हवा
 
दीपक भारतदीप
पसंद करें
0
नापसंद करें

फरिश्तों की दरबार-हिन्दी शायरी

फरिश्तों की दरबार में क्यों हाजिरी लगाने जाते हो, हो सकता है वहां रोज सुबह फर्श धोया जाता हो रंगीन रात के जश्न की धूल धोने के लिये तुम सफेद चेहरों की काली नीयत क्यों नहीं समझ पाते हो। पत्थर के बुतों की तरह खड़े हैं फरिश्ते वहां सांसें लेने के लिये नहीं
पसंद करें
0
नापसंद करें

शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दिन भर वह दोनों ज्ञानी अपने शब्दों की प्रेरणा से लोगों को लड़ाने के लिये झुंडों में बांट रहे थे, रात को लूट में मिले सामान में अपना अपना हिस्सा ईमानदारी से छांट रहे थे। ——- शब्द रट लेते हैं किताबों से, सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से, पर
पसंद करें
0
नापसंद करें

हिंसक तत्वों के साथ मानवाधिकारों का प्रश्न-हिंदी लेख (With violent elements of human rights questions – Hindi article)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में
पसंद करें
0
नापसंद करें

मनु स्मृति-परमात्मा का नाम जपना भी एक तरह से यज्ञ (nam jap yagya-adhyatmik sandesh)

मनु महाराज कहते हैं कि ----------------------------- इंद्रियाणां विचरतां विषयेस्वपहारिषु। संयमे यलमातिष्ठेद्विद्वान्यन्तेव वाजिनाम्।। हिंदी में भावार्थ- एक विद्वान अपने मन और इंद्रियों पर वैसे ही लगाम से नियंत्रण करता है जैसे कि कोई कुशल सारथी अपने घ
टैग: web dunia
पसंद करें
0
नापसंद करें

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-राजा वही जो प्रजा को आजीविका प्रदान करे (raja vahi jo rojgar de-hindu sandesh)

आजीव्यः सर्वभूतानां राजा पज्र्जन्यवद्भुवि। निराजीव्यं त्यजन्त्येनं शुष्कवृक्षभिवाउढजाः।। हिंदी में भावार्थ- राजा मेघों के समान सब प्राणियों को आजीविका देता है। जो राजा प्रजा को आजीविका नहीं दे पाता उसका साथ सभी छोड़ जाते हैं, जिस प्रकार पेड़ को पक्षी छ
 
दीपक भारतदीप