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हिन्दू धर्म संदेश-पैसा कमाने से कभी फुर्सत नहीं मिल सकती

किं तया क्रियते लक्ष्म्या या वधूरिव केवला। या तु वेश्येव सा मान्या पथिकैरपि भुज्यते।। हिन्दी में भावार्थ-उस संपत्ति से क्या लाभ जो केवल घर की अपने ही उपयोग में आती हो। जिसका पथिक तथा अन्य लोग उपयोग करें वही संपत्ति श्रेष्ठ है। धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु
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चाणक्य दर्शन-पैसा जोड़ने से ही शांति नहीं मिलती

धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु चाहारकर्मसु। अतृप्तः प्राणिनः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च।। हिन्दी में भावार्थ- धन और भोजन के सेवन तथा स्त्री के विषयों में लिप्त रहकर भी अनेक मनुष्य अतृप्त रह गए, रह जाते हैं और रह जायेंगे। किं तया क्रियते लक्ष्म्या या
 
दीपक भारतदीप
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चाणक्य नीति दर्शन-खोखले बांस के पेड़ पर हवा प्रभाव नहीं डाल सकती

अंतःसारविहनानामुपदेशो न जायते। मलयाचलसंसर्गान् न वेणुश्चंदनायते।। नीति विशारद चाणक्य जी का मानना है कि मलयाचल पर्वत से प्रवाहित वायु देह के स्पर्श से ही सामान्य पेड़ भी चंदन जैसे सुगंधित हो जाते हैं। एक मात्र बांस का पेड़ ही खोखला होता है जिस पर कोई हवा
 
दीपक भारतदीप
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फरिश्तों की दरबार-हिन्दी शायरी

फरिश्तों की दरबार में क्यों हाजिरी लगाने जाते हो, हो सकता है वहां रोज सुबह फर्श धोया जाता हो रंगीन रात के जश्न की धूल धोने के लिये तुम सफेद चेहरों की काली नीयत क्यों नहीं समझ पाते हो। पत्थर के बुतों की तरह खड़े हैं फरिश्ते वहां सांसें लेने के लिये नहीं
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चाणक्य नीति-उत्तम पुरुषों को गलत बताने वाले कष्ट उठाते हैं

दारिद्रयनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्। अज्ञाननाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी।। हिंदी में भावार्थ-दान से दरिद्रता, शील भाव से दुर्भाग्य तथा निष्ठा से भय का नाश होता है। अन्यथा वेदपाण्डितयं शास्त्रमाचारमन्यतथा। अन्यथा कुवचः शान्तं लोकाः क्लिश्चन्ति
 
दीपक भारतदीप
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शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें

दिन भर वह दोनों ज्ञानी अपने शब्दों की प्रेरणा से लोगों को लड़ाने के लिये झुंडों में बांट रहे थे, रात को लूट में मिले सामान में अपना अपना हिस्सा ईमानदारी से छांट रहे थे। ——- शब्द रट लेते हैं किताबों से, सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से, पर
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हिंसक तत्वों के साथ मानवाधिकारों का प्रश्न-हिंदी लेख (With violent elements of human rights questions – Hindi article)

वर्तमान भौतिकवादी युग में यह मानना ही बेवकूफी है कि कोई बिना मतलब के जनसेवा करता है। अगर लाभ न हो तो आदमी अपने रिश्तेदार को पानी के लिये भी नहीं पूछता। वैसे यह मानवीय प्रवृत्ति पुराने समय से है कि बिना मतलब के कोई किसी का काम नहीं करता पर आजकल के समय में