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बौनेपन का अहसास-हिन्दी शायरी

हम जो भी दृश्य देखते उस पर सोचने लगते हैं, अपने अंतर्मन में पहले से ही स्थित तयशुदा विश्लेषणों के अनुसार उस पर निकालते हैं निष्कर्ष। हम कुछ सुनते हैं उस पर वैसे ही सोचते हैं जैसे कि पहले सुना हो। हम स्पर्श करते हैं फूल या लोहा बेपरवाह होकर जैसे कि उनको
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वफदारी के दलाल-हिन्दी शायरी

हुक्मरानों ने तय कर दी सरहदें आम इंसानों का रास्ता रोकने के लिये, उनकी तन्ख्वाहों पर पलने वाले पहरेदार खड़े हैं आजादी से चलने वालों को टोकने के लिये। सिंहासन पर बैठने वाले चलते हैं उड़न खटोले में सांस लेते हैं मातहतों के टोले में, बेईमानों और दहशतगर्दों का
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हिन्दू धर्म संदेश-अज्ञानी करते हैं स्वर्ग की कल्पना

भर्तृहरि महाराज के अनुसार  ————————- स्वपरप्रतारकोऽसौ निन्दति योऽलीपण्डितो युवतीः। यस्मात्तपसोऽपि फलं स्वर्गस्तस्यापि फलं तथाप्सरसः।। हिन्दी में भावार्थ-शास्त्रों का अध्ययन करने वाले कुछ अल्पज्ञानी
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जुबां का रिश्ता-हिन्दी शायरी

आखों से अब अश्क नहीं बहते क्योंकि दर्द का दरिया सूख गया है, जहां दिल लगाया दिल्लगी समझ जमाने ने मुंह फेरा अब बयां नहीं करते किसी से अपने हाल अपनी ही हकीकतों से हमारी जुबां का रिश्ता टूट गया है। ———- उनकी प्यार भरी निगाहें देखकर हमने
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भूत की सवारी-हिन्दी व्यंग्य

एक विशेषज्ञ का मानना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले में बिन लादेन बहुत पहले ही मारा जा चुका है पर अमेरिका के रणनीतिकार युद्ध जारी रखने के लिये उसका भूत बनाये रखना चाहते हैं ताकि वहां की खनिज, कृषि और तेल संपदा पर कब्जा बना रहे। ऐसा लगता है कि अमेरिकन
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विज्ञापन तय करते हैं कहानी-आलेख

आखिर यह कोई सुनियोजित एजेंडा है या अनजाने में बन गयी सोच कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धर्मों पर टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में ऐसी कहानियां दिखाईं जातीं है जिससे उसका नकारात्मक पक्ष अधिक प्रकट होता है। फिल्मों और धारावाहिकों में अनेक बार लंबे समय तक
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सौदागरों के बुत-व्यंग्य शायरी

अख़बारों में छपे बड़े बड़े शख्सों के बयान अब आखों से आगे बढ़कर दिल की गहराई में नहीं जाते. ढेर सारा कागज़ का भंडार है चारों तरफ उसे खाने के लिए अक्षर पक्षी चाहिए स्याही की बह रही हैं धारा, मिलना जरूरी है उसको भी किनारा, बाज़ार के सौदागर केवल शय ही नहीं