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दिल्लगी-हिन्दी शायरी (dillagi-hindi shayari)
दिल लगाने के ठिकानेअब नहीं ढूंढतेक्योंकि दिल्लगी बाज़ार की शय बन गयी है,मोहब्बत का पाखंड अबखुश नहीं कर पाताक्योंकि जहां बहता है जज़्बातों का दरियावह मतलब की बर्फ जम गयी है।---------आसमान के उड़ने की चाहत मेंइतनी ऊंची छलांग मत लगाओकि जमीन पर गिरने परशरीर को
May 14 2010 10:29 AM



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