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दिल्लगी-हिन्दी शायरी (dillagi-hindi shayari)

दिल लगाने के ठिकानेअब नहीं ढूंढतेक्योंकि दिल्लगी बाज़ार की शय बन गयी है,मोहब्बत का पाखंड अबखुश नहीं कर पाताक्योंकि जहां बहता है जज़्बातों का दरियावह मतलब की बर्फ जम गयी है।---------आसमान के उड़ने की चाहत मेंइतनी ऊंची छलांग मत लगाओकि जमीन पर गिरने परशरीर को
 
दीपक भारतदीप
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बेबस की आग-हिन्दी शायरी (bebas ki aag-hindi shayri)

अपनी जरूरतों को पूरा करने में लाचार,बेकसूर होकर भी झेलते हुए अनाचार,पल पल दर्द झेल रहे लोगों कोकब तक छड़ी के खेल से बहलाओगे।पेट की भूख भयानक है,गले की प्यास भी दर्दनाक है,जब बेबस की आग सहशीलता कापर्वत फाड़कर ज्वालमुखी की तरह फूटेगीउसमें तुम सबसे पहले जल
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दौलतमंदों का सजा बाज़ार-हिन्दी शायरी (daulatmandon ka bazar-hindi shayari)

पैसे कमाने का हुनरदुनियां में सबसे अच्छा माना जाता है,भले ही कोई फन हो न होदौलतमंद खरीद लेता हैसारे फनकार कौड़ी के भाव इसलिये हुनरमंद भी माना जाता है। -----------मयस्सर नहीं हैं जिनको रोटीउनसे ज़माना खौफ खाता है।इसलिये फुरसत मिलने पर करते हैं सभी गरीब का
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एकता की कोशिश-हिन्दी शायरी

भीड़ में एकता की कोशिश पर हंसी आ ही जाती है। जहां पहले ही चीख रहे हैं लोग अपनी करनी का बखान करते हुए बंद किये हैं कान, आंखों  से ढूंढ रहे अपने लिये सम्मान, वहां शांति के नारे की आवाज शोर करती नजर आती है। ——- वफादारी  खामोश जज़्बात के