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वादा कर के मुकर गया कोई

वादा कर के मुकर गया कोई, आँखों में अश्क दे गया कोई। दे दीं हर धड़कनें जिसे हमने, साँसों का क़त्ल कर गया कोई । रोज़ आते थे जो हमारे दर पर, गर्दिश-ए-वक़्त छल गया कोई । नूर-ए-दिल था जो कभी अपना, आज बेनूर बन गया कोई । दिल की गलियों में जो विचरते थे, बिन कहे दिल