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"टिप्पणियों के अभाव में" !!

मिलकर रहो क्या रखा है अलगाव में!!दिल की सुनो मत बहको किसी के दबाव में!!क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई क्या !!इंसानियत का नाता हो आत्मा के लगाव में!!प्रेम सोहार्द मिलते नहीं बाजार के भाव में !भावनाओं को मत मारो खुदगर्जी के चाव में !! जात पात घृणा
 
खुला सांड
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भारत में भारतीय ना मिला||

सांड खुला है खुला ही चरता है!भारतीयता का दम भरता है ||पर भारत में कोई भारतीय ना मिला|अपना बना सकूँ ऐसा कोई आत्मीय न मिला ||जिससे भी मिला मुझसे मेरा नाम पूछा |सब मेरे नाम से डरे मेरा पता मेरा धाम पूछा || मैं भारतीय हूँ मैंने सबको बताया |पर इतने से लोगों
 
खुला सांड
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