सुण बै ढपोरशंख.....
ब्लाग एक सार्वजनिक अभिव्यक्ति का माध्यम है लेकिन कईं बार ऐसा लगता है कि लोग इसे बपौति मान रहे हैं अपनी समझ से बाहर है मामला मगर कुछेक टिप्पणियों के पढ़ने के बाद एक ताज़ा छंद आप सब की नज़्र करता हूं किसुण बै ढपोरशंख तू तो बेटे बावला हैएक बात बार-बार-बार
May 15 2010 09:33 PM



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