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चाँद से उतरी तीन त्रिवेनियाँ

1-हमने पिकनिक मनाई थी खला मेंअपनी गाडी ख़राब हो गयी थी चाँद की शर्ट पे है ग्रीस अभी ========================2-चाँद अब भी उन्ही रास्तों में पड़ा है देखो तेरे ख़याल में जा कर निकलना चाहता थातेरा तसव्वुर ..लखनऊ का इमामबाडा ==========================3-तेरी
 
स्वप्निल कुमार 'आतिश'
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तीन त्रिवेनियाँ (२)

१जागी जागी सी सोयी सोयी सीज़िन्दगी है थकी रसोई सीतुम आओ के ये बर्तन खनकें ...२उसकी आँखों में मैंने बाँध दी आँखें अपनीऔर उसके दिल में जा कर खुल गया मैं हौले सेमुहब्बत की गिरह ..बंधे कहीं ..खुले कहीं ..३लिख दिया डायरी पे नाम तेरासहम के बैठ गया कोने मेंबम
 
स्वप्निल कुमार 'आतिश'
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तीन त्रिवेनियाँ

१-नए किरदार भी मचलते हैंफ़साने पूरी रात जलते हैंतुम्हारे जिक्र से क्या ना हो ?२-चाँद जब फलक से वाबस्ता होचादनी इक हसीन रस्ता होतुम उतर कर ज़मीं पे आ जाना३-ये सूरज जो पूरे दिन यहाँ पे जलता हैसुना है शाम के बाद अमरीका में जलेगाइस चिराग ने भी उम्र भर दहलीज़
 
स्वप्निल कुमार 'आतिश'
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त्रिवेणी 2

बोने से बबूल आम नहीं मिलते कभी, खार से तो बस हाथ ही छिला करते हैं.सुना है पडोसी देश आतंकवाद का शिकार है.*************************घूमता है कुम्हार का चाक जबकितना हुनर बिखेर देता है जग में.ये बता ए वक़्त तेरा कुम्हार कहाँ बस्ता
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त्रिवेणी

चांदनी है जब तक ज़मीन पर कोई चाँद को देखता तक नहीं,जो आजाती है अमावस बीच में, चाँद की कमी खलने लगती है.रिश्तों ने भी आज कल कुछ यूँही घटना बढ़ना सीख लिया है.--नीरज 
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