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कोडाईकैनाल में

--हरिशंकर राढ़ीहमारी बस अपनी तीव्र गति से प्रकृति का स्पर्श करती हुई कोडाईकैनाल की तरफ बढ़ी जा रही थी।पर्वतमाला हमारे साथ-साथ चल रही थी और हम उत्सुक थे कि हम इनके अन्दर प्रवेश करें। इसी पर्वतपाद प्रदेश में बस चालक ने एक रेस्तरां पर बस रोकी और उस खुले से
 
Hari Shanker Rarhi
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भाँग, भैया, भाटिन, भाभियाँ, गाजर घास ... तीन जोड़ी लबालब आँखें - 4

पहला भागदूसरा भागतीसरा भाग लौटते हुए सोचता हूँ - सढ़ुआन का यह रिश्ता अभी एक पीढ़ी पहले तक गौण सा रिश्ता माना जाता था। बहनापा बना रहता था लेकिन साढ़ुओं में कहीं भाइचारे का ईर्ष्यालु पक्ष ही प्रबल रहता था। बढ़ते शहरीकरण ने परिवारों को केन्द्रिक बनाया है तो
 
गिरिजेश राव
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मीनाक्षी के बाद

मीनाक्षी के बादमंदिर से निकलते-निकलते अंधेरा हो चुका था । विद्युत प्रकाश में नहाया हुआ मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर प्रांगण के बाहर से और भी मनमोहक लग रहा था। फिर भी हम अब बाहर की दुनिया में वापस आ चुके थे। अर्थ-व्यवहार एवं दुकानदारी के चिर परिचित
 
Hari Shanker Rarhi
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पोंगापंथ अपटु कन्याकुमारी -5

( मेरी यात्रा मदुराई तक पहंची थी, उसका वर्णन मैंने किया था। उसके बाद वास्तविक यात्रा तो नहीं रुकी किन्तु उसका वर्णन रुक गया।इस बीच में कुछ तो इधर - उधर आना जाना रहा और कुछ कम्प्यूटर महोदय का साथ न देना। पहले विण्डोज उड़ीं और फिर लम्बे समय तक इण्टरनेट नहीं
 
Hari Shanker Rarhi
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यादें केरल की : भाग 3 - आइए सैर करें बहुदेशीय ऍतिहासिक विरासतों के शहर कोच्चि यानी कोचीन की...

यूँ तो कोचीन का इतिहास बड़ा पुराना है पर आज तक इसके नाम की व्युत्पत्ति पर सारे इतिहासकार एक मत नहीं हैं। इसकी एक वज़ह ये भी है कि कोचीन के व्यवसायिक महत्त्व के चलते यहाँ अरब, चीनी, पुर्तगाली, डच और अंग्रेज सभी आए और इन सब ने इस जगह को अपने इतिहास के
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यादें केरल की : भाग 1 - कैसा रहा राँची से कोचीन का 2300 किमी लंबा रेल का सफ़र

अक्सर लोग दिसंबर से मार्च के बीच अपना सालाना पर्यटन का कार्यक्रम बनाते हैं। खासकर दिसंबर की आखिरी की छुट्टियाँ तो इसके लिए सबसे उपयुक्त रहती हैं। समूचा उत्तर जब ठंड में कटकटाता रहता है तो भारत का दक्षिणी कोना बिल्कुल इस ठंड से अछूता रहता है। तो नए साल
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विश्व की संगीत राजधानी – वियाना

इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है। yeh chitthi vienna yatra ka varnan hai. This post is about my visit to Vienna.
 
उन्मुक्त
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विश्व की संगीत राजधानी – वियाना

इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है। yeh chitthi vienna yatra ka varnan hai. This post is about my visit to Vienna.
 
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पोंगापंथ अप टु कन्याकुमारी -4

तिरुअनन्तपुरम में अब कुछ खास नहीं बचा था इसलिए हमने सोचा कि हमें अब आगे चल देना चाहिए। दिल्ली में बैठे- बैठे हमने जो योजना बनाई थी उसके मुताबिक हम तिरुअनन्त पुरम में एक रात रुकने वाले थे। इसी योजना के अनुसार हमने 23 सितम्बर के लिए मदुराई पैसेन्जर में
 
Hari Shanker Rarhi
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नज़ारे भितरकनिका के : मैनग्रोव के जंगल, नौका विहार और पक्षियों की दुनिया !

पिछली पोस्ट में आपको मैं ले गया था भुवनेश्वर से भितरकनिका के मैनग्रोव जंगलों के प्रवेश द्वार यानि गुप्ती चेक पोस्ट तक। करीब ६५० वर्ग किमी में फैले इन मैनग्रोव वनों का निर्माण ब्राहाम्णी, वैतरणी और धर्मा नदियों की लाई और जमा की गई जलोढ़ मिट्टी के बनने से
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चाँदीपुर समुद्र तट : जहाँ समुद्र रात में आता और सुबह गायब हो जाता है...

समुद्र तट तो कई देखे हैं पर कुछ तट अपनी विशिष्टता के कारण स्मृतियों से कभी ज्यादा दूर नहीं जा पाते। आज से करीब दस-बारह साल पहले की बात है। हम सड़क मार्ग से जमशेदपुर से भुवनेश्वर जा रहे थे। जमशेदपुर से भुवनेश्वर करीब ४०० किमी दूरी पर है। हम दिन में चार बजे
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