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अभिनय

हे अभिनेता! तुम अभिनय को अपने द्वारा निभाए गये पात्र को वास्तविक न मानने लगना| तब अभिनय भी एक ऐसा नशा हो जाएगा जो जीवन के वास्तविक स्वरूप को हटाकर कहीं और व्यस्त कर देता है दिमाग को और कुछ समय के लिए व्यक्ति जो वह नहीं है वही होने का भ्रम पाल लेता
 
स्वार्थ