अन्याय का गणित
हमअपने समय के सबसे बेईमान और बेरहम वक्त के जबड़ों में फँसे हैं जहाँ हैवानी नस्ल इंसानी पैदावार की शगल में मुक्ति के शब्द भुलाकर ऐय्यास क्रियाएँ खेल रही हैं इंसान होने की परिभाषा साहित्य से स्थगित होकर खद्दरों के मुँह में घुस गयी है सपनीले नग्मों के
Jun 01 2010 10:07 AM



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