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अन्याय का गणित

हमअपने समय के सबसे बेईमान और बेरहम वक्त के जबड़ों में फँसे हैं जहाँ हैवानी नस्ल इंसानी पैदावार की शगल में मुक्ति के शब्द भुलाकर ऐय्यास क्रियाएँ खेल रही हैं इंसान होने की परिभाषा साहित्य से स्थगित होकर खद्दरों के मुँह में घुस गयी है सपनीले नग्मों के
 
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63 साल की आज़ादी और बाबा साहेब के लोग

आज बाबा साहेब की 119वीं जयंती है। आज हम उसी दलित-जागरण आंदोलन के अग्रदूत को श्रद्धाँजलि स्वरूप सूरज बड़त्या की एक कविता का प्रकाशन कर रहे हैं। अयम्मासूरज बड़त्यासूरज बड़त्या दिल्ली में दलित साहित्य और आंदोलन को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने
 
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