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"धड़क धड़क तेरे बिन मेरा जियरा" - दो नामी गायिकाएँ लेकिन उनकी दुर्लभ जोड़ी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 420/2010/120 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में हम पिछले नौ दिनों से सुन रहे हैं दुर्लभ गीतों से सजी लघु शृंखला 'दुर्लभ दस'। इन गीतों को सुनते हुए आपने महसूस किया होगा कि ये सभी बेहद कमचर्चित फ़िल्मों के गानें हैं। बस 'बिलवा मंगल' को छोड़ कर
 
सजीव सारथी
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"अखियाँ मिलाके अखियाँ" - गायिका सुरिंदर कौर की पुण्यतिथि पर 'आवाज़' की श्रद्धांजली

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 418/2010/118 अभी कल यानी १४ तारीख़ को पुण्यतिथि थी इस गायिका की. ५ साल पहले, आज ही के दिन, सन् २००६ को पंजाब की कोकिला सुरिंदर कौर की आवाज़ हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई थी। गायिका सुरिंदर कौर के गाए अनगिनत पंजाबी लोक गीतों को पंजाबी
 
सजीव सारथी
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कहीं "मादनो" की मिठास से तो कहीं "मैं कौन हूँ" के मर्मभेदी सवालों से भरा है "मिथुन" के "लम्हा" का संगीत

ताज़ा सुर ताल २२/२०१०विश्व दीपक - ’ताज़ा सुर ताल' में हम सभी का स्वागत करते हैं। तो सुजॊय जी, पिछले हफ़्ते कोई फ़िल्म देखी आपने?सुजॊय - हाँ, 'राजनीति' देखी, लेकिन सच पूछिए तो निराशा ही हाथ लगी। कुछ लोगों को यह फ़िल्म पसंद आई, लेकिन मुझे तो फ़िल्म बहुत ही
 
विश्व दीपक
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"मोहन प्यारे अब और साज़ पर गा रे" - सी. एच. आत्मा की आवाज़, पर सहगल साहब का अंदाज़

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 417/2010/117 कुंदन लाल सहगल साहब की गायकी के नक्ष-ए-क़दम पर चलने वाले गायकों में एक नाम सी. एच. आत्मा का भी है। सी. एच. आत्मा बहुत ज़्यादा कामयाब तो नहीं हो सके, लेकिन उनके गाए बहुत से गीत और भजन उस ज़माने में बेहद मशहूर हुए थे।
 
सजीव सारथी
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"कहीं भी अपना नहीं ठिकाना" - ऐसे भूले बिसरे गीत का ठिकाना केवल 'आवाज़' ही है

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 416/2010/116 'दिल-ए-नादान' सन् १९५३ की एक ऐसी फ़िल्म थी जिसमें तलत महमूद के गाए कुछ गानें बेहद लोकप्रिय हुए थे, जैसे कि "ज़िंदगी देनेवाले सुन तेरी दुनिया से जी भर गया", "जो ख़ुशी से चोट खाए, वो जिगर कहाँ से लाऊँ", "ये रात सुहानी
 
सजीव सारथी
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क्या क्या कहूँ रे कान्हा...पी सुशीला और रमेश नायडू ने रचा ये दुर्लभ गीत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 415/2010/115 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर इन दिनों आप सुन रहे हैं गुज़रे ज़माने के कुछ भूले बिसरे नग़में 'दुर्लभ दस' लघु शृंखला के अन्तर्गत। कल इसमें हमने आपको सुनवाया था दक्षिण की सुप्रसिद्ध गायिका एस. जानकी की आवाज़ में एक बड़ा ही मीठा सा
 
सजीव सारथी
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चैन मोरा लूटा मोरे राजा सुन....एस जानकी के स्वरों में सजा एक दुर्लभ मुजरा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 414/2010/114 कुछ दुर्लभ गीतों से इन दिनों हम सजा रहे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की महफ़िल को। आज इसमें प्रस्तुत है दक्षिण की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी की आवाज़ में एक भूला बिसरा गीत फ़िल्म 'दुर्गा माता' से। यह एक मुजरा गीत है
 
सजीव सारथी
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"जय दुर्गा महारानी की" - क्या आपने पहले कभी सुनी है संगीतकार चित्रगुप्त की गाती हुई आवाज़?

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 412/2010/112 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की कल की कड़ी मे हमने सुनी थी सबिता बनर्जी की गाई हुई एक दुर्लभ फ़िल्मी भजन। आज के गीत का रंग भी भक्ति रस पर ही आधारित है। भारतीय फ़िल्म जगत में सामाजिक फ़िल्मों के साथ साथ धार्मिक और पौराणिक विषयों पर
 
सजीव सारथी
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"ज़रा मुरली बजा दे मेरे श्याम रे" - सबिता बनर्जी की आवाज़ में एक भूला बिसरा भजन

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 411/2010/111 नमस्कार दोस्तों! बेहद ख़ुशी और जोश के साथ हम फिर एक बार आप सभी का 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की महफ़िल में हार्दिक स्वागत करते हैं। पिछले डेढ़ महीने से आप हर शाम 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' का आनंद ले रहे थे, और हमें पूरी उम्मीद है
 
सजीव सारथी
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महान फनकारों के सुरों से सुर मिलते आज हम आ पहुंचे हैं रिवाईवल की अंतिम कड़ी में ये कहते हुए - तू भी मेरे सुर में सुर मिला दे...

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ४५ पिछले ४५ दिनों से, यानी डेढ़ महीनों से आप 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर सुन रहे हैं रिवाइवल सुनहरे दौर के सदाबहार नग़मों का, जिन्हे हमारे कुछ जाने पहचाने साथियों की आवाजों में। आज हम आ पहुँचे हैं इस विशेष शृंखला की अंतिम कड़ी पर। इस
 
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गीत कभी बूढ़े नहीं होते, उनके चेहरों पर कभी झुर्रियाँ नहीं पड़ती...सच ही तो कहा था गुलज़ार साहब ने

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ४४ गुलज़ार, राहुल देव बर्मन, आशा भोसले। ७० के दशक के आख़िर से लेकर ८० के दशक के मध्य भाग तक इस तिकड़ी ने फ़िल्म सम्गीत को एक से एक यादगार गीत दिए हैं। लेकिन इनमें जिस फ़िल्म के गानें सब से ज़्यादा सुने और पसंद किए गए, वह फ़िल्म
 
सजीव सारथी
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दो युवा प्रेमियों के प्रेम तो कभी प्रेम त्रिकोण को आधार बना कर लिखी गयी बहुत सी फ़िल्में, और अनेकों गीत भी

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ४३ राज कपूर कैम्प की एक मज़बूत स्तम्भ रहीं हैं लता मंगेशकर। दो एक फ़िल्मों को छोड़कर राज साहब की सभी फ़िल्मों की नायिका की आवाज़ बनीं लताजी। राज कपूर और लताजी के संबंध भी बहुत अच्छे थे। इसी सफल फ़िल्मकार-गायिका जोड़ी के नाम आज के
 
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क्या लता जी की आवाज़ से भी अधिक दिव्य और मधुर कुछ हो सकता है कानों के लिए

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ४२ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में आज हम जिस गीत का रिवाइव्ड वर्ज़न लेकर आए हैं, वह है सन् १९९१ में बनी फ़िल्म 'लेकिन' से। हृदयनाथ मंगेशकर द्वारा स्वरबद्ध इस गीत को लता जी ने गाया था। ९० के दशक के शुरु शुरु में आई इस फ़िल्म के गीतों
 
सजीव सारथी
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रफ़ी साहब- एक ऐसी आवाज़ जिसने जाने कितनी बार हम सब के जज़्बात अपने स्वरों में उकेरे है

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ४१ कल ही हम यह बात कर रहे थे कि शक़ील साहब ने ज़्यादातर काम नौशाद साहब के साथ किया है, तो लीजिए इस मशहूर जोड़ी के नाम करते हैं आज की 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' कड़ी को। मुस्लिम सबजेक्ट पर बनी फ़िल्मों में 'मेरे महबूब' का शुमार
 
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कुदरत के नज़रों की खूबसूरती का बयां करते हुए भी बने कई नायाब गीत

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३९ दिलीप कुमार के पार्श्वगायन की अगर बात करें तो सब से पहले उनके लिए गाया था अरुण कुमार ने उनकी पहली फ़िल्म 'ज्वार भाटा' में। उसके बाद कुछ वर्षों के लिए तलत महमूद बने थे दिलीप साहब की आवाज़। बाद में रफ़ी साहब की आवाज़ ही ज़्यादा
 
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ये वो दौर था जब फ़िल्में एक खास उद्देश्य से बनती थी, जाहिर है संगीत पर भी खूब मेहनत होती थी

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३८ बी. आर चोपड़ा हिंदी सिनेमा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं। उनकी हर फ़िल्म हमें कुछ ना कुछ ज़रूर संदेश देती है। आज उन्ही की फ़िल्म 'धूल का फूल' से एक युगल गीत, जिसे फ़िल्म के लिए लता मंगेशकर और महेन्द्र कपूर ने गाया था। साहिर
 
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पार्श्वगायकों और अभिनेताओं की भी जोडियाँ बनी इंडस्ट्री में, जो अभिनय और आवाज़ में एकरूप हो गए

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३७ मोहम्मद रफ़ी शम्मी कपूर की आवाज़ हुआ करते थे। इस जोड़ी ने ६० के दशक में फ़िल्म जगत में वो हंगामा किया कि अब वो इतिहास बन चुका है। आज पेश है रफ़ी और शम्मी साहब की जोड़ी का एक सदाबहार गीत फ़िल्म 'तीसरी मंज़िल' से। पंचम की धुन पर
 
सजीव सारथी
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फिल्म में गीत लिखना एक अलग ही किस्म की चुनौती है जिसे बेहद सफलता पूर्वक निभाया बीते दौर के गीतकारों ने

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३६ १९५५ में निर्माता निर्देशक ए. आर. कारदार ने किशोर कुमार और चांद उसमानी को लेकर बनायी फ़िल्म 'बाप रे बाप'। १९५२ तक नौशाद साहब ही कारदार साहब की फ़िल्मों में संगीत दे रहे थे। उसके बाद ग़ुलाम मोहम्मद, मदन मोहन और रोशन जैसे
 
सजीव सारथी
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कविहृदय शैलेन्द्र ने जब फ़िल्मी गीत लिखे तो उनके कलम स्पर्श से सैकड़ों गीत अमरत्व पा गए

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३५ फ़िल्म 'तीसरी कसम' से जुड़ी बहुत सी बातें हमने समय समय पर 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में की है। आज इसी फ़िल्म का गीत "सजनवा बैरी हो गए हमार" हम सुनने जा रहे हैं। तो आइए आज शैलेन्द्र के जीवन से जुड़ी कुछ बातें की जाए। हम आप तक फिर एक बार
 
सजीव सारथी
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संगीतकारों के अग्रणी नामों के पीछे कुछ ऐसे दिग्गज भी थे जिन्हें वो सब नहीं मिल पाया जिसके वो हक़दार थे

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३३ आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में एक बड़ा ही ख़ूबसूरत और दुर्लभ गीत। दुर्लभ इसलिए कि इस गीत के संगीतकार ने अपने करीयर में केवल १४ फ़िल्मों में संगीत दिया। जी हाँ, सज्जाद हुसैन। आज सुनिए उनकी धुन में फ़िल्म 'रुस्तम सोहराब' का गीत
 
सजीव सारथी
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पुराने नायाब गीतों की सफलता में उन अदाकारों का अभिनय भी एक अहम घटक रहा जिन्होंने इन गीतों को परदे पर जीया

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३२ राग अहिरीभैरव में रचा सचिन देव बर्मन का एक उत्कृष्ट रचना के साथ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' की आज की कड़ी में हम उपस्थित हुए हैं। फ़िल्म 'मेरी सूरत तेरी आँखें' में मन्ना डे साहब ने शैलेन्द्र के लिखे इस गीत को पुर्णता तक पहुँचाया
 
सजीव सारथी
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मजरूह, साहिर जैसे नामी गिरामी शायरों ने भी एक लंबी पारी खेली बतौर गीतकार

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३1 'ओल्ड इस गोल्ड रिवाइवल' के अंतरगत आप कुल ४५ गानें सुन रहे हैं इन दिनों एक के बाद एक, और इस शृंखला का दो तिहाई हिस्सा पूरी कर चुके हैं। यानी कि ३० गीत हम सुन चुके हैं और अभी १५ गानें और सुनवाने हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ये कवर
 
सजीव सारथी
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भारतीय और पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत, दोनों में ही माहिर थे सलिल दा

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २९ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में आज प्रस्तुत है गीतकार योगेश का लिखा, सलिल चौधरी का संगीतबद्ध किया हुआ फ़िल्म 'छोटी सी बात' का शीर्षक गीत। इस गीत को आप '१० गीत समानांतर सिनेमा के' शृंखला में सुन चुके हैं। गीतकार योगेश द्वारा
 
सजीव सारथी
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प्रेम में आपसी छेड छाड, नोंक झोंक आदि रहा फ़िल्मी युगल गीतों का विषय अमूमन

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २८ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में आज हमने जिस गीत का रिवाइव्ड वर्ज़न शामिल किया है, उसका ऒरिजिनल वर्ज़न तो अभी इस महफ़िल में बजना बाक़ी है। बड़ा ही प्यारा युगल गीत है फ़िल्म 'मॊडर्ण गर्ल' का, जिसे सुमन कल्याणपुर और मुकेश ने गाया
 
सजीव सारथी
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मोरा पिया मोसे बोलत नाहीं.. लोक, शास्त्रीय और पाश्चात्य-संगीत की मोहक जुगलबंदी का नाम है "राजनीति"

ताज़ा सुर ताल १९/२०१०विश्व दीपक - नमस्कार दोस्तों, 'ताज़ा सुर ताल' की एक और ताज़ी कड़ी के साथ हम हाज़िर हैं। आज जिस फ़िल्म के संगीत की चर्चा हम करने जा रहे हैं वह है प्रकाश झा की अपकमिंग् फ़िल्म 'राजनीति'। १० बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रकाश झा
 
विश्व दीपक
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नौशाद - शकील की जोड़ी ने हिंदी फिल्म संगीत को जन जन का संगीत बनाया उसका सरलीकरण करके

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २७ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में आज प्रस्तुत है शक़ील - नौशाद की एक रचना जिसे फ़िल्म के लिए मोहम्मद रफ़ी ने गाया था। फ़िल्म 'दुलारी' का यह गीत है "सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे"। १९४९ का साल शक़ील-नौशाद के लिए एक सुखद
 
सजीव सारथी
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फिल्म के विषय और संगीत को अद्भुत रूप से मिलाने में भारतीय फिल्म निर्देशकों का विश्व में कहीं कोई सानी नहीं

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २६ मनोज कुमार की सुपर हिट देश भक्ति फ़िल्म 'पूरब और पश्चिम' का गीत है "कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे, तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए"। आज इसी गीत का रिवाइवल
 
सजीव सारथी
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कुछ गीत इंडस्ट्री में ऐसे भी बने जिनका सम्बन्ध केवल फिल्म और उसके किरदारों तक सीमित नहीं था...

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २४ "चैन से हमको कभी आप ने जीने ना दिया, ज़हर जो चाहा अगर पीना तो पीने ना दिया"। फ़िल्म 'प्राण जाए पर वचन ना जाए' का यह दिल को छू लेने वाला गीत आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' की महफ़िल को रोशन कर रहा है। ओ. पी. नय्यर और आशा भोसले ने
 
सजीव सारथी
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४०० एपिसोडों के लंबे सफर में ओल्ड इस गोल्ड ने याद किये कुछ ऐसे फनकारों को भी जिन्हें समय ने भुला ही दिया था

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २३ ४० के दशक की एक प्रमुख गायिका रहीं हैं ज़ोहराबाई अंबालेवाली। भले ही फ़िल्म संगीत का सुनेहरा दौर ५० के दशक से माना जाता है, लेकिन सुनहरे गीतों का यह सिलसिला ४० के दशक के मध्य भाग से ही शुरु हो चुका था, और इसी दौरान ज़ोहराबाई के
 
सजीव सारथी
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असरदार शब्द और वजनदार संगीत, लाजवाब गायन जाने कितने जाने अनजाने संगीत कर्मियों ने मिलकर संवारा है फिल्म संगीत का ये संसार

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २१ मुकेश की आवाज़ में राज कपूर और माला सिन्हा अभिनीत फ़िल्म परवरिश में हसरत जयपुरी का ही लिखा और दत्ताराम का स्वरबद्ध किया हुआ यह गीत है "आँसू भरी हैं ये जीवन की राहें, कोई उनसे कह दे हमें भूल जाए"। संगीतकार दत्ताराम शंकर जयकिशन
 
सजीव सारथी
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प्रीतम लाए हैं बदमाश कम्पनी वाली अय्याशी तो शंकर एहसान लॊय के साथ है धन्नो की हाउसफुल महफ़िल

ताज़ा सुर ताल १८/२०१०सुजॊय - विश्व दीपक जी, साल २०१० के चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि वह एक गीत अभी तक नहीं आ सका है जिसे इस साल का 'सॊंग ऒफ़ दि ईयर' कहा जा सकता हो। मेरे हिसाब से तो इस साल का संगीत कुछ ठंडा ठंडा सा चल रहा है। आपके
 
विश्व दीपक
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बेहतर तालमेल के चलते इंडस्ट्री में बनी गीतकार -संगीतकारों की ढेरों सफल जोडियाँ, और इन जोड़ियों ने खेली लंबी पारियाँ

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # २० 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में आज रिवाइवल उमा देवी की गाई उस शानदार यादगार गाने की जिसे आपने इसी महफ़िल में कमचर्चित गायिकाओं पर केन्द्रित शृंखला 'हमारी याद आएगी' में कड़ी नं ३३२ में सुना था। उत्तर प्रदेश के एक खत्री परिवार में जन्मीं
 
सजीव सारथी
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क्रांतिकारी कवि प्रदीप ने फ़िल्मी गीतों को दी आकाश सी ऊंचाई, रचकर एक से एक कालजयी गीत

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १८ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में हमारे आज के गीत के गीतकार एक ऐसे शख़्स हैं जिनकी लेखनी और गायकी में झलकता है उनका अपने देश के प्रति प्रेम और देशवासियों में जागरूक्ता लाने की शक्ति। कवि प्रदीप, जिन्होने असंख्य देश भक्ति के गीत और
 
सजीव सारथी
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दादा रविन्द्र जैन ने इंडस्ट्री को कुछ बेहद नयी और सुरीली आवाजों से मिलवाया, जिसमें एक हेमलता भी है

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १७ 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' की आज की कड़ी में आप सुनेंगे रवीन्द्र जैन के गीत संगीत में फ़िल्म 'अखियो के झरोखों से' का वही मशहूर शीर्षक गीत जिसे हेमलता ने गाया था और फ़िल्म में रंजीता पर फ़िल्माया गया था। गीत सुनने से पहले थोड़ी
 
सजीव सारथी
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गुदगुदाने वाले गीतों से श्रोताओं को झूमने वाले झुमरू किशोर दा का था एक संजीदा चेहरा भी

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १६ आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' पर पेश है फ़िल्म 'मिली' का एक गीत। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की २३२ वीं कड़ी में, १३ अक्तुबर के दिन (जो किशोर दा की पुण्य तिथि और दादामुनि अशोक कुमार की जयंती है), हमने इस फ़िल्म से "आए तुम याद मुझे" गीत
 
सजीव सारथी
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दर्द और मुकेश के स्वरों में जैसे कोई गहरा रिश्ता था, जो हर बार सुनने वालों की आँखों से आंसू बन छलक उठता था

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १५ हिंदी फ़िल्मों में विदाई गीतों की बात करें तो सब से पहले "बाबुल की दुयाएँ लेती जा" ज़्यादातर लोगों को याद आता है। लेकिन इस विषय पर कुछ और भी बहुत ही ख़ूबसूरत गीत बने हैं और ऐसा ही एक विदाई गीत आज हम चुन कर ले आये हैं। मुकेश की
 
सजीव सारथी
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मल्टी स्टारर फिल्मों में सुनाई दिए कुछ अनूठे यादगार मल्टी सिंगर गीत भी

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १४ आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' पर हम एक ऐसा गीत लेकर आए हैं जिसे ऒरिजिनली चार महान गायकों ने गाया था। इतना ही नहीं, इन चारों गायकों का एक साथ में गाया हुआ यह एकमात्र गीत भी है। इसीलिए यह गीत फ़िल्म संगीत के इतिहास का एक बेहद
 
सजीव सारथी
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दरिया उबालने को आ पहूँचे हैं अमित त्रिवेदी और शेल्ली.... फिल्म है "एडमिशन्स ओपन"

ताज़ा सुर ताल १७/२०१०सुजॊय - 'ताज़ा सुर ताल' की एक और कड़ी के साथ मैं और विश्व दीपक तन्हा जी हाज़िर हैं। विश्व दीपक जी, आज आप हमारे श्रोताओं को किस नए फ़िल्म के गानों से रु-ब-रु करवा रहे हैं।विश्व दीपक - आज हमने एक ऐसी फ़िल्म चुनी है जो शायद फ़ॊरमुला
 
विश्व दीपक
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न कोई था, न कोई होगा हरफनमौला किशोर दा जैसा

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # १२ आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' में किशोर कुमार की यादें ताज़ा होंगी। फ़िल्म 'झुमरू' का वही दर्द भरा नग़मा "कोई हमदम ना रहा, कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे, कोई हमारा न रहा"। गीत मजरूह साहब का और बाकी सब कुछ किशोर दा का। आइए आज
 
सजीव सारथी
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एक से एक हिट गीत दिए एल पी की जोड़ी ने, और वो भी अपनी शर्तों पर काम कर

ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ११ आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड रिवाइवल' के तहत पेश है फ़िल्म 'दो रास्ते' का वही सदाबहार गीत "ये रेशमी ज़ुल्फ़ें, ये शरबती आँखें"। सन् २००५ में विविध भारती ने रफ़ी साहब की पुण्यतिथि पर कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया था। और इसी के तहत
 
सजीव सारथी
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