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समय केले का छिलका है....

चाँद का पानी पीकर,लोग कर रहे होंगे गरारे...और झूम रही होगी जब सारी दुनिया...मशीन होते शहर में,कुछ रोबोट-से लोगढूँढते होंगे,ज़िंदा होने की गुंजाइश।किसी बंद कमरे में,बिना खाद-पानी केलहलहा रहा होगा दुःख...माँ के प्यार जितनी अथाह दुनिया केबित्ते भर हिस्से
 
निखिल आनन्द गिरि
टैग: suicide
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क्या आत्महत्या ही सारी समस्याओं का हल है?

क्या आत्महत्या ही सारी समस्याओं का हल है?ये सवाल मेरे अकेले का नही है और ये अचानक़ ही मेरे दिल-दिमाग में उथल-पुथल नही मचा रहा है।पिछले कुछ दिनों से इस सवाल ने मुझे बैचैन कर दिया है।आखिर आत्महत्या से सारी समस्यायें खत्म कैसे हो सकती है?मेरे हिसाब से तो
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आखिर कब तक सहूँगी- Domestic Violence Debate-3-

उसका मन चीत्कार कर उठा. कब तक आखिर कब तक वह यह सब सहती रहेगी? किसी को उस पर दया न आती न पडोसियों को ससुराल वालो को न पीहर वालों को. रोज पिटना, गाली सुनना उसकी नियति थी. फिर उसने बहुत ही कठोर कदम उठाया, एक दिन अपने बच्चों समेत खुदकुशी कर ली उसने...ऎसी
 
Sunita Sharma
टैग: suicide