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टेलिविजन की स्टैंडिंग कामेडी

मूलत: प्रकाशित- दैनिक जागरण 1 अप्रैल 2010स्टैंडिंग कॉमेडी। टीवी पर यह नई चीज है। इसमें स्त्री-पुरुष संबंधों को लेकर सस्ती गॉसिप्स हैं, जजों के बेवजह ठहाके हैं, डबल मीनिंग पैदा करने वाले जबर्दस्ती के प्रयोग हैं, तो बोलने से ज्यादा हरकतों से हास्य पैदा
 
विनीत कुमार
टैग: stand-up comedy