क़यामत का इंतज़ार
सोनिया जी,नमस्कार । यह पत्र शुरु करने से पहले हम दो शे'र अर्ज़ करना चाहेंगे-गज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया ।तमाम रात क़यामत का इंतज़ार किया ।हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तकखुदा करे की क़यामत हो और तू आए ।इन दोनों ही शे'रों में इंतज़ार महत्त्वपूर्ण है
Mar 21 2010 10:38 AM



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