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मां के लिए.....

कितनी बार माँ मैंने देखा है तुमको संकोच में,कब किससे, कहूँ, क्या, कब, कैसे, की सोच में,अपने ही घर की बैठक में गुमसुम तुम,परोस रही चाय-पकौड़ी अंग्रेजी मेज पर,और खाली प्यालों में खोजती हस्ती अपनी,जो बेजुबान हो गयी है अपने ही देश मेंऔर कितनी ही बार माँ, बचपन
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यूँ समापन हुआ होली पर्व का

यूँ तो हाड़ौती (राजस्थान का कोटा संभाग) में होली की विदाई न्हाण हो चुकने के उपरांत होती है। न्हाण इस क्षेत्र में होली के बारहवें दिन मनाया जाता है। हमारे बचपन में हम देखते थे कि होली के दिन रंग तो खेला जाता था लेकिन केवल सिर्फ गुलाल से। लेकिन गीले रंग या
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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