0
मां के लिए.....
कितनी बार माँ मैंने देखा है तुमको संकोच में,कब किससे, कहूँ, क्या, कब, कैसे, की सोच में,अपने ही घर की बैठक में गुमसुम तुम,परोस रही चाय-पकौड़ी अंग्रेजी मेज पर,और खाली प्यालों में खोजती हस्ती अपनी,जो बेजुबान हो गयी है अपने ही देश मेंऔर कितनी ही बार माँ, बचपन
May 09 2010 09:12 AM



Shuffle








