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एक गैर के वास्ते-हिन्दी शायरी (paraye ke vastei-hindi shayari)

नगर में पर्दे पर महानगर को तैरता देखकरउसमें उतरने के लिये हर युवा दिल मचलता हैमालुम न था उसे पत्थर के इस जंगल मेंकातिल बीज भी पलता है,जो साथ लेकर बुरा समय फलता है,सौंदर्य के सौदागर हर मोल परखरीदने कौ तैयार हैं, दरियालदिल दिखते पर सब मतलब के यार
 
दीपक भारतदीप
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ख्यालों के जुए में-हिन्दी शायरी (khyal ek juaa hai-hindi shayari)

मस्ती के कुछ पलजीने की खातिरजिंदगी दांव पर मत लगाना,जाना उतना ही दूरजहां से संभव हो घर लौट आना।जिंदगी के मायने सभी नहीं जानते,कायदों को बंधन की तरह मानते,जज़्बात तो हवा के झौंके हैंकभी हंसी तो कभी गम के, ढेर सारे आते मौके हैं, छोटे पल के लिये पूरी जिंदगी
 
दीपक भारतदीप
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गुलाम मानसिकता-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (gulam mansikata-hindi satire poem)

अब नहीं आती उनकी बेदर्दी परहमें भी शर्म,क्योंकि बिके हुए हैं सभी बाज़ार मेंचलेंगे वही रास्ताजिस पर चलने की कीमत उन्होंने पाई।आजादी के लिये जूझने का हमेशा स्वांग करते रहेंगे,विदेशी ख्यालों को लेकरदेश के बदलाव लाने के नारे गढ़ते रहेंगेक्योंकि गुलाम मानसिकता
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दर्द और इलाज-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (dard aur ilaj-hindi shayari)

जिन मुद्दों पर निष्कर्ष न निकलेबहस उन्हीं पर करवाई जाती है।निरंतर चलती रहे शब्दों की जंग,खून के धब्बों में ढूंढते आदर्श के रंग,समस्याओं के खत्म होने की सोचते नहींजहां हल न निकले, चर्चाकार खड़े हैं वहीं,काली स्याही से कागज भरते रहें,इलाज से अधिक दर्द की
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समाज सेवा और अपराध-हिन्दी क्षणिकायें (social service and crime-hindi short poem)

समाज सेवा शुरु करने से पहलेकोई न कोई अपराध करना जरूरी है,लोग देते हैं डर कर चंदाकभी नहीं पड़ता धंधे में मंदा,घी निकालने के लिये टेढी उंगली की तरहचलना आजकल की मजबूरी है।----------नैतिकता की बातें करते वह लोग,दौलत पाने की चाहत का लगा जिनको रोग।सिमट गया है
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खोखली धरा पर महल-हिन्दी क्षणिकायें (khokhli dhara par mahal-hindi kshanikaen)

नैतिकता का पैमाना कितना भी नीचे जाये,काले धन के कुऐं से नीचे नहीं गिरेगा,जहां धरती पर लहरा नही फसलकिसान के परिश्रम और लगन सेवहां इंसानियत का सच दिखेगा।---------7सफेदपोशों ने कर लिया दौलत के कुओं पर कब्जा,गरीब और मजदूर प्यासे रह गये,मेहनतकश कर ले तसल्ली
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सर्वशक्तिमान का दरवाजा-हिन्दी हास्य कविता (thief and states-hindi hasya kavita)

हांफता हुआ आया फंदेबाज और बोला‘दीपक बापू, आज तो निकल गया इज्जत का जनाजाबज जायेगा मेरे नाम का भी बाजा,घर से पर्स में केवल पचास रुपये लेकर निकला था कि कट गया,मेरे लिये तो जैसे आसमान फटा गया,अब चिंता इस बात की है किकभी चोर पकड़ा गया तोमेरा पर्स भी
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कौन जगायेगा अलख-हिन्दी शायरी (kaun jagayega alakh-hindi shayri)

विकास दर इतनी ऊंची हो गयी है कि नैतिकता कहीं भीड़ में खो गयी है।आदर्श की बात करना मजाक लगता हैराहजनी की वारदात का इल्जाम रहबरों के सिर पर डलता है,माली से उज़ाड़ दिया बागशिकायत करना बेकार है,शैतानियत बन गयी है फैशनशैतानों के बाहर खड़ा पहरेदार है,ज़माना काबू है
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ताजमहल और पसीना-मज़दूर दिवस पर कविता(tajmahal aur mazdoor-hindi shayari)

ताजमहल प्यार का प्रतीक हैया परिश्रम कायह समझ में न आया।शहंशाह ने लूटा गरीब का खज़ाना,कहलाया वह नजराना,मजदूरों ने अपना खून पसीना बहाकरसंगमरममर के पत्थर सजाये,फिर अपने हाथ कटवाये,कहीं कब्र में दफन था मुर्दाजिसकी हड्डिया भी धूल हो गयी,उठकार रख दी वह सभीनये
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कसूर की सजा मिलती है-हिन्दी शायरी (kasoor ki sajaa-hindi shayari)

अपराध की कामयाबी सेतभी आदमी तक डोलता हैजब तक वह सिर चढ़कर नहीं बोलता है।यह कहना ठीक लगता है किजमाना खराब है,चमक रहा है वही इंसानजिसके पास शराब और शबाव है,मगर यह सच भी है किसभी लोग नहीं डूबे पाप के समंदर में,शैतान नहीं है सभी दिलों में अंदर में,भले इंसान
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विकास दर और मजदूर-हिन्दी शायरी (vikas dar aur mazdoor-hindi shayari)

चार मजदूररास्ते में ठेले पर सरिया लादेगरमी की दोपहरतेज धूप में चले जा रहे थे,पसीने से नहा रहे थे। ठेले पर नहीं थी पानी से भरी कोई बोतलयाद आये मुझे अपने पुराने दिनपर तब इतनी गर्मी नहीं हुआ करती थीमेरी देह भी इसी तरहधूप में जलती थीपर फिर ख्याल आयादेश की
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रिश्ते और जज़्बात-हिन्दी शायरी (rishtey aur jazbat-hindi shayari)

पेड़, पौद्ये, पशु और पक्षी मेंदिल लगाना ही क्यों अच्छा लगता है,शायद इसलिये कि इंसानों की तरहजज़्बातों से वह खिलवाड़ नहीं करते हैं।धोखे खाये होंगे हजार जमाने से,थक गये इंसानों को आजमाने से,दुर्गंध और बदनीयती से हुआ सामनाजब मिले इंसानी चेहरों से,इसलिये दे
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क्रिकेट और चैरिटी-हिन्दी हास्य कविता (cricket and charity-hindi hasya kavita)

हांफता हुआ आया फंदेबाज और बोला‘दीपक बापूतुमने अपनी पूरी जिंदगी क्रिकेट मैच देखने में गंवाई,कुछ धंधे पानी की सोचते तो पर कभी ‘चैरिटी’ (समाज सेवा) करने परअपनी अक्ल न चलाई,करते तुम भी लोगों का भलाहो जाती तुम्हारी भी कमाई।’सुनकर दीपक बापू हुए हैरान फिर
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क्या पता कब दिल तोड़ दे !!!!!!!

 वो अजनबी है जाने कब छोड़ दे ,हवा का क्या पता कब रुख मोड़ दे ,हम तो दुसरो का दिल खुश रखते है ,मगर दूसरो का क्या पता कब दिल तोड़ दे | 
 
संजय भास्कर
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अपने अरमानों का आसमान-हिन्दी शायरी (apne araman ka asman-hindi shayri)

उन पर क्या एतबार करेंजो यकीन की बाज़ार कीमतलगाये जाते हैं,वफादारी की कसमें खाते हैं रोजपर किसी से निभाई होइसका सबूत नहीं देतेक्या वह रिश्ता निभायेंगेप्यार और दोस्ती काजो पहले अपनी जरूरत पूरी करने काशोर मचाये जाते हैं। ----------इस दुनियां में रिश्तों
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खून और पानी-हिन्दी शायरी (khoon aur pani-hindi shayri)

जमीन पर बिखरे खून पर भीअपने ख्यालों की वह तलवार चलायेंगे,कातिलों से जिनका दिल का रिश्ता हैवह उनके जज़्बातों का करेंगे बखानलाश के चारों ओर बिखरे लाल रंग कोपानी जैसा बतायेंगे। ----------गम भी बिकता है तोखुशी भी बाजार में सजती है।खबरफरोशों को तो बसखबर
 
दीपक भारतदीप
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डर है घर के नादानों से-हिन्दी शायरी (ghar ke nadan-hindi shayri)

घाव थोड़ा हो वह ज्यादा दिखलाते हैं,भला करने वाले इसलिये कहलाते हैं।लाल स्याही से लिखते, जमाने का बयान,जंग का इनाम अमन बताते हैं।रहबर हो गये कुर्बाल, जमाने के लियेवह उनके उसलों पर उंगली उठाते हैं। वातानुकूलित कक्षों मे रहते, कारों में जाते हुएबदनसीबों की
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चल यूँ कर लें

दिखाई दे हर शय में तुझे, उसे ऐसे आँखों में भर लें| महकता रहे ज़हन हमेशा, उसे ऐसे सांसों में भर लें| कुछ ना रहे माज़ी का बाकी, उसे ऐसे यादों में भर लें| सिर्फ एक लकीर हो किस्मत की, उसे ऐसे हाथों में भर लें| हर लफ्ज़ में घुल जाए ज़िक्र, उसे
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आईने में

फिर सर झुकाये दिखे हम आईने में, फिर खुदको छुपाये दिखे हम आईने में| जो अक्स धुंधला दिया वक्त ने, उससे फिर घबराये दिखे हम आईने में| Filed under: कविताएँ, Hindi Poetry, Shayari, Sher Tagged: आईने में
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अप्रैल फूल यानि मूर्ख दिवस-हास्य कविता (april fool-hindi hasya kavita)

एप्रिल फूल अब क्या मनायेंयहां तो खुद ही रोज मूर्ख बन जायें।नकली नायकों को पर्दे पर दिखाकरदेवताओं की तरह उनका नाम जपायें।बेकसूर रहें खौफ के साये मेंकसूरवार जेल में भी जश्न मनायें।सजाया है बाजार ने पर्दे पर खेलउसमें आम इंसान अपनी नज़र गंवायें।रोज रोज वादे
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mere ashaar 1

" दिल के जज़्बात बयां करती है कलम की ज़ुबां           आ के काग़ज़ पे ये अहसास अमर होते हैं ."
 
Ajmal Khan
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mere ashaar 2

" ज़मीर कुंद, नज़र तंग और न ज़ेब जुबां    ऐसे लोगों से मेरे "अल्लाह " बचाना मुझको "                     <><><>" उनको अहसास
 
Ajmal Khan
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पछतायेगा

मुझको खुदा मत बना पछतायेगा! मैं बंदगी नहीं इखलास का प्यासा हूँ, मुझको इबादत मत बना पछतायेगा| है मुझ में दर्द कई, मैं भी नाराज़ हूँ खुदसे, मुझको फरिश्ता मत बना पछतायेगा| मैं हासिल से दूर ही भला, खाली हाथ जाऊँगा| मुझको सिकंदर मत बना
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नायक और खलनायक-व्यंग्य कवितायें (nayak aur khalnayak-hindi vyangya kavitaen)

धोखे, चाल और बेईमानी काअपने दिमाग में लियेबढ़ा रहे हैं वह अपना हर कदम,अपनी जुबान से निकले लफ्ज़ोंऔर आंखों के इशारो सेजमाने का भला करने का पैदा कर रहे वहम।भले वह सोचते हों मूर्ख लोगों कोपर हम तोलने में लगे हैं यह किकौन होगा उनमें से बुरा कम,किसे लूटने दें
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शब्द और गणित-हिन्दी व्यंग्य कविता (word and mathmatics-hindi vyangya kavita)

उपदेश देते हुए उनकी जुबान बहुत सुहाती हैं,और बंद कमरे में उनकी हर उंगली चढ़ावे के हिसाब में लग जाती है।किताबों में लिखे शब्द उन्होंने पढ़े हैं बहुतसुनाते हैं जमाने को कहानी की तरहपर अकेले में करते दौलत का गणित से हिसाबलिखने में कलम केवल गुणा भाग में चल
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आदत.. मुस्कुराने की

यु ही मुस्कुराने की आदत बना राखी है हमने लाखो गम जी सीने में छुपाये हुए है अब खुद पे ऐतबार करके देखेंगे ,हम दोस्त तो सारे आजमाए हुए है  |  ......संजय भास्कर.....
 
संजय भास्कर
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इक शेर

कुछ खास मूड नहीं लिखने का बस इक शेर याद आ रहा है किसब कुछ लुटा दिया तेरे प्यार में सितमगरइक भैंस बच गई थी वो आज बेच दी बाय बाय
 
योगेन्द्र मौदगिल
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सोच की ताज़गी-हिन्दी व्यंग्य कविता (soch ki tazgi-hindi vyangya kavita)

अपनी सोच पर इतना न इतराओकि उसको कोई हिलाने लगे,किसी पर न उछालो कीचड़ किछींटे तुम्हारे चेहरे पर भी आकर गिरेंफिर तुमको कोई आईना दिखाने लगे।हवा के झौंके हैं सभी यहांतुम भी बह जाओगे,कोई नया कहेगा,तुम पुराने हो जाओगे,नई सांसों की ताजगी के साथ जीना सीखोनहीं तो
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रास्ता बंद कर दो-हिन्दी व्यंग्य कविता (rasta band kar do-hindi vyangya kavita)

मशहूर हो जाने परवही बताओ दूसरों को रास्ते,जो चुने नहीं तुमने अपने वास्ते।कुछ नया कहने के लियेचारों तरफ तुम्हें तारीफ भी मिलेगी,तुम्हारे चाहने वालों के चेहरेपर हंसी भी खिलेगी,सोचने का शऊर न होपर दिखना तो चाहिये,भले ही लफ्ज़ खुद न समझोपर लिखना तो चाहिये,कोई
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ख्यालों के खेल में-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (khyalon ke khel men-hindi satire poem)

खुद रहे जो जिंदगी में नाकामदूसरों को कामयाबी कापाठ पढ़ा रहे हैं।सभी को देते सलीके से काम करने की सलाह,हर कोई कर रहा है वाह वाह,इसलिये कागज पर दिखता है विकास,पर अक्ल का हो गया विनाश,एक दूसरे का मुंह ताक रहे सभीकाम करने के लियेजो करने निकले कोई उसकी टांग
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शायदी यही विकास कहलाता है-हिन्दी कविता (it is devlopment-hindi satire poem)

कच्ची बस्तियों का उजड़नापत्थर के महलों का बसना हीशायद यही विकास कहलाता है।गांवों का बढ़ते बढ़ते शहर हो जानाशहरों में दिलों का सिकुड़ जानाशायद यही विकास कहलाता है।नीयत का काला हो जाना,बदनीयत को चतुराई जताना,शायद यही विकास कहलाता है।आजाद मजदूर का गरीब हो
 
दीपक भारतदीप
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अहसास और सोच-हिन्दी व्यंग्य कविता (ahsas aur soch-hindi vyangya kavita)

देखते हैं घर की सजावटदिल का प्यार नहीं देखते,थाली में सजे व्यंजन पर है नज़रसांसों की धड़कन में पल रहेजज़्बात नहीं देखते।इंसानी बुतों की दिल्लगी मेंढूंढ रहा है पूरा जमानाकोई ख्वाबी जन्नतहकीकत के इंसान नहीं देखते।---------अपने दिमाग पर उठाये बोझघूम रहे हैं
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इंसान और प्रकृति-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (men and neture-hindi satire poem)

हैरानी है इस बात पर किसमलैंगिकों के मेल पर लोगआजादी का जश्न मनाते हैं,मगर किसी स्त्री पुरुष के मिलन परमचाते हैं शोरउनके नामों की कर पहचान,पूछतें हैं रिश्ते का नाम, सभ्यता को बिखरता जताते हैं।कहें दीपक बापूआधुनिक सभ्यता के प्रवर्तकपता नहीं कौन हैं,सब इस
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प्रायोजित सनसनी-हिन्दी व्यंग्य कविता (sporsard story-hindi satire poem)

वस्त्रों के रंगों से चरित्र की पहचानकभी नहीं होती है,पद का नाम कुछ भी होइंसानों से निभाये बिनाउसकी कदर नहीं होती है।जोगिया पहनकर करते जिस्म का व्यापारजोगी धन जुटाने का कर रहे चमत्कार,जब पोल सामने आयेजयकारा बोलने वालों के मुख से भीहाहाकार की आवाज बुलंद
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किताब बना लूँ

कुछ बिखरे तन्हा ख्याल उठा लूँ, पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ| रख लूँ बूंद बूंद अश्क संभाल कर, कभी इनसे सुलगते सवाल बुझा लूँ| पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ … नहीं मौत मेरे कब्ज़े में तो क्या, आ तुझे मैं अपनी साँस बना लूँ| पन्ना
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अपने को अनमोल रत्न बताते-हिन्दी व्यंग्य शायरियां (anmol ratna-hindi comic poem)

वादों का व्यापारदिल बहलाने के लिये किया जाता है,मतलब निकल जाये तोफिर निभाने कौन आता है।-----------विषयों को भूल जानाउनके सोचने का तरीका है।अपनी कहते रहते हैंसुनने का नहीं उनको सलीका है।-----------बहसों को दौर चलेजाम टकराते हुए।अपनी अपनी सभी ने कहीमुंह
 
दीपक भारतदीप
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आंसु भी हंसी में बदल जाते हैं-हिन्दी व्यंग्य क्षणिकायें (ansu aur hansi-hindi satire poem)

फिक्र हो या नहीं करते दिखना,एक झूठ कोसौ बार सच लिखना,ईमानदारी और वफा के कायदों सेकोई वास्ता हो या न होकामयाबी का बस एक ही दस्तूर हैबाजार में महंगे भाव बिकना।--------कभी कभी आंखों के आंसु भीहंसी में बदल जाते हैंजब हमदर्द कम करने की बजायदर्द बढ़ाने लग जाते
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पेशा है अमीरों को गलियां देना-हिन्दी व्यंग्य शायरी (trede of welfare-hindi satire poem)

 नारे लगाकर हुई कमाई सेवाद चलाये जाते हैं,आतंक वाले उदार दिखने की कोशिश करतेतो लोगों की तरक्की के लिये जूझने वालेहिंसा को जरूरी बताये जाते हैं।इस अर्थयुग में जमाने का मुफ्त में भला करने वालेकहां से आयेंगे,ख्याल हैं जिनके पुरानी किताबों के गुलामकब
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लफ्ज़ बोलकर निभाया-हिन्दी व्यंग्य कविता (lafza bolkar nibhaya-hindi satire poem)

अपने शरीर से निकले पसीने पर भीकभी तरस नहीं आया,परिश्रम से हर रिश्ता निभाया।पांव में लगी कीलें अनेक बारहाथों मे रस्सियों ने छोड़े निशानदर्द बांटा अपनों और परायों सेपर अपनी हर जंग में खुद को अकेला पाया।दोस्तों के विश्वास पर खरे उतरेपर अपना यकीन उन पर नहीं
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सादगी से वार-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (sadgi se war-hindi satire poems)

उनकी नज़रों मे आते हैं हमेशा तलवारें चलने के मंजरजुबां से गरीबों और बेसहारों पर जमाने के दिये घावों काबयां किये जा रहे हैं।हर जगह बेसहारों के लियेहमदर्दी दिखाते हैं,अमन के लिये जंग करना सिखाते हैं,अपने हाथ में लिये छुरा कर लिया हैउन्होंने पीठ पीछेजहां में
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