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एक गैर के वास्ते-हिन्दी शायरी (paraye ke vastei-hindi shayari)
नगर में पर्दे पर महानगर को तैरता देखकरउसमें उतरने के लिये हर युवा दिल मचलता हैमालुम न था उसे पत्थर के इस जंगल मेंकातिल बीज भी पलता है,जो साथ लेकर बुरा समय फलता है,सौंदर्य के सौदागर हर मोल परखरीदने कौ तैयार हैं, दरियालदिल दिखते पर सब मतलब के यार
May 11 2010 08:12 PM



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