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बाज़ार के भगवान-हिन्दी हास्य कविताएँ

बाज़ार में नीलाम हो जायेंवही लोग आजकल कहलाते ‘बड़’े है,डरते है जो बिकने से या काबिल नहीं बिकने केवह छोटे इंसानों की पंक्ति में राशन लेने खड़े हैं।----------अब इस धरती परभगवान अवतार नहीं लेते,जिसकी नीलाम बोली ऊंची लगायें सौदागरलोग उसे ही भगवान मान
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शजर पर एक ही पत्ता बचा है

शजर पर एक ही पत्ता बचा है हवा की आँख में चुबने लगा है नदी दम तोड़ बैठी तशनगी से समन्दर बारिशों में भीगता है कभी जुगनू कभी तितली के पीछे मेरा बचपन अभी तक भागता है सभी के खून में गैरत नही पर लहू सब की रगों में दोड़ता है जवानी क्या मेरे बेटे पे आई मेरी आँखों
 
JATINDER PARWAAZ
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