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सेक्स टॉइज

हे असं भलतं सलतं डिस्कस करणं तर दुरच, पण इथे आपल्या समाजात यावर बोलणं पण वाईट समजलं जातं, तरी पण आज यावर काहीतरी लिहिण्याची हिम्मत करतोय. खरं तर हा विषय आपल्या समाजात अजुनही टॅबो या सदरातच मोडतो. परवाचीच गोष्ट आहे, फोर्ट ला फाउंटन आय एन एस (आंग्रे)
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लवेरिया हुआ ,मगर हुआ क्यूं ?

कमीने इश्क के बाद जो कुछ और सामग्री इस बहुप्रिय विषय पर मेरे खलीते में थी उसे रिसायिकिल बिन में डाल दिया था ,मगर आज फिर उस बिन को खलिया कर निकाल लाया हूँ -अब चिट्ठे पर भी कभी कभार कुछ कचरा नहीं आयेगा तो फिर कैसे श्रेष्ठ रचनाओं की तुलनात्मक साख बनेगी !
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प्यार में ज़रा संभलना ......बड़े धोखे हैं इस राह में !

मानव प्यार की जटिलताओं को विवेचित करती लगातार यह  तीसरी पोस्ट इस श्रृखला की फिलहाल अंतिम कड़ी है ! इश्क से दीगर मसले और भी तो हैं ! प्रेम के जोडों में कई कुदरती अवरोधक (जिनकी चर्चा पिछले पोस्ट में हुयी है ) अनुपयुक्त साथी की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने
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यह इश्क कमीना -क्या सचमुच ?

प्रेम पर इधर कुछ गंभीर चिंतन मनन शुरू हुआ है जिसे आप यहाँ  ,यहाँ और यहाँ देख सकते हैं ! मंशा है कि इसी को थोड़ा और विस्तार दिया जाय ! हो सकता है कुछ लोग रूचि लें ! कबीर तो कह गए कि ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय -मगर यह 'ढाई आखर' है क्या और कोई
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