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हैलो सर ! मैं ढगला राम बोल रहा हूँ !

मोबाइल की घण्टी बजती है। साहब गहरी नींद में हैं। बड़ी मुश्किल से आज नींद लेने का समय मिला है। पिछली दो रातों से जिले भर के गांवों के दौरे पर थे। दिन–दिन भर चलने वाली बैठकें, जन समस्याएं, ढेरों शिकायती पत्र, लम्बे चौड़े विचार–विमर्श और फिर रात में बैठकर
 
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जिन्दगी हमेशा के लिये उनका चालान काट चुकी है !

वाहनों से खचाखच भरी सड़कें। दु्रत गति से दौड़ती मोटर साइकिलें, बेतहाशा भागती कारें, पगलाई हुई सी लोडिंग टैक्सियां, बेचैन आत्माओं की तरह भटकते थ्री व्हीलर और इन सबके बीच सर्र–सर्र निकलते साइकिल सवार। जिधर देखो अफरा–तफरी का माहौल। मानो कायनात में जलजला आ
 
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उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता !

पाकिस्तानी दूतावास में द्वितीय सचिव स्तर की महिला राजनयिक को गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान के हाथों बेचने के आरोप में पकड़ा गया। भारतीय एजेंसियों के अनुसार यह तिरेपन वर्षीय महिला राजनयिक, भारतीय गुप्तचर एजेंसी रॉ के इस्लामाबाद प्रमुख से महत्वपूर्ण सूचनायें
 
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मेरी भैंस ने आई पी एल कर दिया रे!

आजकल ब्लॉग लेखन का भी एक अच्छा खासा धंधा चल पड़ा है। अंग्रेजी की तरह हिन्दी भाषा में भी कई तरह के रोचक ब्लॉग उपलब्ध हैं। एक ब्लॉग पर मुझे एक मजेदार कार्टून दिखाई पड़ा। इस कार्टून में एक भैंस गोबर कर रही है और पास खड़ा उसका मालिक जोर-जोर से चिल्ला रहा है-
 
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धरती के भगवानो! क्या औरत के बिना दुनिया चल सकती है!

अहमदाबाद में कचरे की पेटी में पड़े हुए 15 कन्या भ्रूण मिले। कुछ भ्रूण कुत्ते खा चुके थे, वास्तव में संख्या 15 से कहीं अधिक थी। ये तो वे भ्रूण थे जो रास्ते पर रखी कचरे की पेटी में फैंक दिये जाने के कारण लोगों की दृष्टि में आ गये। यह कार्य तो पता नहीं
 
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मो देखत मो दास दुखित भयौ, यह कलंक हौं कहाँ गवैहों ?

इस बार फिर ब्रजभूमि जाना हुआ। वही ब्रजभूमि जिसकी धूल का स्पर्श करने के लिये सहस्रों वर्षों से भारत के कौने-कौने से श्रध्दालु आते हैं। वही ब्रजभूमि जिसके स्मरण मात्र से विष्णु भक्तों का रोम-रोम पुलकित हो जाता है। वही ब्रजभूमि जिसकी पावन धरा का स्पर्श करने
 
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क्या जावा और सी प्लस प्लस के समक्ष देशज भाषायें टिक पायेंगी !

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही राजस्थान में राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूचि में संलग्न करवाये जाने को लेकर आंदोलन चल रहा है। संभवत: इतनी बड़ी अवधि तक भारत भर में आज तक और कोई आंदोलन नहीं चला किंतु फिर भी इस आंदोलन को सफलता प्राप्त नहीं हो
 
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कुली कर लो केवल बीस रुपये में !

भारतीय रेलवे संसार की चौथे नम्बर की सबसे बड़ी रेलवे है। लाखों यात्री प्रतिदिन भारत भर में फैले रेलवे स्टेशनों पर पहुंचते हैं। परम्परागत रूप से भारतीय लोग घर का बना हुआ भोजना खाना और अपने स्वयं के बिस्तरों में सोना पसंद करते हैं। इसलिये स्वाभाविक ही है कि
 
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धुऑं बहुत है कोटा की गलियों में !

कोटा को शिक्षा की नगरी कहना वस्तुत: सम्पूर्ण राजस्थान की शिक्षा पध्दति का अपमान करना है। राजस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश में हजारों विद्यालय, सैंकड़ों महाविद्यालय और दर्जन भर विश्वविद्यालय खोल रखे हैं। पूरे प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों,
 
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बहुत कठिन है डगर कोटा की !

राजस्थान का कोटा शहर! लाखों किशोर-किशोरियों का मन जहां कल्पनाओं की उड़ान भरकर पहुचंता है और कोटा की गलियों में खड़े कोचिंग सेंटरों को देखकर ठहर सा जाता है। कोटा के नाम से ही अभिभावकों के हृदय में गुदगुदी होने लगती है। उन्हें लगता है कि उनका बच्चा यदि एक
 
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क्या अंतर है दो घंटे और दो साल की रिलेशनशिप में !

लिव इन रिलेशनशिप वाला फण्डा अपन की समझ में नहीं आया। वैसे भी अंग्रेजी नाम वाली चीजें आवश्यक तो नहीं कि भारतीयों को समझ में आयें और उन्हें अनुकूल भी जान पड़ें। लिव इन रिलेशनशिप का अर्थ है बिना विवाह किये स्त्री–पुरुष एक साथ रहें। एक–दो दिन, या दो चार साल,
 
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उदास है भारत माता !

हम भारतीय लोग धरती, गौ, गंगा, गीता, गायत्री और पराई स्त्री को माता मानते हैं। इन सब माताओं से बढ़कर यदि कोई और भी है जिसे हम माता का सम्मान देते हैं तो वह है भारत माता। भारत माता पर उसकी सारी संतानें बलिदान होने का स्वप्न देखती हैं फिर भी यह कैसी
 
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युवाओं को संवदेना विहीन बनाती है रैगिंग!

रैगिंग पाश्चात्य जीवन शैली की कुछ अत्यंत बुरी बुराइयों में से है, जिसे भारतीयों ने कुछ अन्य बुराईयों की तरह जबर्दस्ती ओढ़ लिया है। यह अपने आप में इतनी बुरी है कि हम विगत कई वर्षों से प्रयास करने के उपरांत भी इसे महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से समाप्त
 
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हमारी समस्त माताएं संकट में हैं !

जन्मदात्री माता की तरह धरती, गौ, गंगा, गीता, गायत्री और पराई स्त्री को भी हम माता मानते हैं। यह विशाल धरती प्राणी मात्र की माता है जो हमारे मल–मूत्र और गंदगी को सहन करके, जल और अन्न से हमारा शरीर बनाती है और उसे जीवित रखती है। गौ हमें अपने दूध से पुष्ट
 
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पहले तो निवास करती थी लक्ष्मी, अब बसती है बदबू !

भारतीय संस्कृति में दो ऐसी बातें कही गई हैं जो भारतीय संस्कृति की विलक्षणता को उसकी समग्रता में प्रकट करती हैं। पहली तो यह कि महाराज परीक्षित ने कलियुग को स्वर्ण में निवास करने के आदेश दिये और दूसरी यह कि देवताओं ने लक्ष्मी से गाय के गोबर में निवास करने
 
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ऐसे तो हम लड़ाई हार जायेंगे

यदि धन खो जाये तो समझिये कि कुछ नहीं खोया, स्वास्थ्य खो जाये तो समझिये कि कुछ खो गया किंतु चरित्र खो जाये तो समझिये कि सर्वस्व खो गया। इस समय भारतीय समाज के भीतर इस कहावत से ठीक उलटा काम हो रहा है। लोग अपने स्वास्थ्य और चरित्र को बेचकर पैसा बटोरने में
 
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जिम्मेदारियां निभाने वाली आवारा हैं वे !

वह लावारिस नहीं है किंतु सारे दिन आवाराओं की तरह रहती है। वह शहर की किसी भी भीड़ भरी सड़क अथवा चौराहे पर खड़ी हुई दिखाई दे जाती है, कभी अकेली तो कभी झुण्ड में। सर्दी, गर्मी और बरसात में भले ही ट्रैफिक का सिपाही थोड़ा हट कर खड़ा हो जाये किंतु वह मानव सभ्यता की
 
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दीदी नहीं, बॉस कहो !

वे दोनों एक ही गली में रहती हैं। उन दोनों की उम्र में केवल एक साल का अंतर है। दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह जानती हैं। पहली लड़की नगर के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज के द्वितीय वर्ष की छात्रा है। दूसरी लड़की ने उसी कॉलेज के पहले वर्ष में प्रवेश लिया है।
 
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क्या आप अठारह साल से ऊपर हैं !

क्या आप अठारह साल से ऊपर हैं ? जिंदगी की बोरियत दूर करना चाहते हैं ? कुछ ठहाके लगाना चाहते हैं ? अपने दोस्तों को कुछ ऐसा भेजना चाहते हैं जिसे पढ़कर उनके चेहरे पर स्माईल आ जाये तो प्लीज हमें इस नम्बर पर एस एम एस या कॉल कीजिये। चार्जेज एक रुपया प्रति एस एम
 
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दिनचर्या का वर्केबल मॉडल ढूंढा जाना चाहिये

आजकल हर घर में हर समय सिनेमा चलता है। स्कूली बच्चे, आफिस जाने वाले पति–पत्नी, बिजनिस में लगे लोग और घर के बड़े–बूढ़े अपनी दिनचर्या का काफी समय बिस्तर या सोफे पर पड़े रहकर टीवी देखने में खर्च करते हैं। महिलाओं ने कुछ खास चैनलों पर आने वाले धरावाहिक पकड़
 
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मौत का कुआँ खुदने में देर नहीं लगती !

मनुष्य के भाग्य का आकलन उसे मिले सुख से होता है। कुछ लोगों के लिये सुख का अर्थ है भौतिक सुख जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य, शिक्षा, धन, गृह, प्रसिद्धि एवं लोक–प्रतिष्ठा जैसे तत्व सम्मिलित होते हैं जबकि कुछ लोगों के लिये सुख का अर्थ मानसिक सुख अर्थात् मन की उस
 
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महंगी शादी का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों की बरबादी !

मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने आम आदमी के मन की पीड़ा को शब्द दिये। आम भारतीय जिस बात को चीख–चीख कर कहना चाहता है, उसे पारदर्शी शब्दों में व्यक्त करने करने की कला श्री गहलोत को आती है। उन्होंने शादियों में हो रहे पैसे के वीभत्स प्रदर्शन पर तीखा प्रहार
 
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श्रीमती उषा गर्ग

सच्चाई की राह पर चलने वाला दूसरों को भी पार लगा देता है उषा गर्ग का जन्म 14 मई 1961 को आगरा में हुआ। उनके पिता श्री सोहनलाल सेठ कानपुर के विक्रमादित्य सनातन धर्म कॉलेज में बी. एड. के विभागाध्यक्ष थे तथा माता श्रीमती प्रेम सेठ, आगरा के प्रतिष्ठित हैडर्ड
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बच्चों को विकलांग बना सकता है डी जे !

विवाह एक पारिवारिक आयोजन है किंतु आधुनिक जीवन शैली में आम आदमी के व्यक्तिगत सम्पर्कों में हुए कईगुना विस्तार के कारण भारतीय विवाह सार्वजनिक मेले की तरह दिखाई देने लगे हैं जिनमें हजारों नर–नारीसम्मिलित होते हैं। बहुत कम लोग होते हैं जो केवल पारिवारिक
 
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कविता के बिना रोबोट बन जायेगा मनुष्य !

प्रख्यात शिक्षाविद् यशपाल ने भारत के वर्तमान परिदृश्य पर करारी टिप्पणी की है। हाल ही में रिलीज हुई एक पुस्तक की भूमिका में उन्होंने लिखा है– तकनीकी शिक्षा पर जोर देने से परिस्थितियां बिगड़ी हैं, यदि व्यक्ति साहित्य, संगीत और दर्शन से दूर रहेगा तो दुनिया
 
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गांधी के नाम पर दे दे बाबा!

गांधी के नाम पर दे दे बाबा। रुपया नहीं पौण्ड चलेगा, गांधी के नाम पर ढोंग चलेगा। ये वे डेढ पंक्तियां हैं जो उस समय से मेरे मस्तिष्क में घूम रही है जब से मेरे मित्र द्वारका दास माथुर ने मुझे अपनी इंगलैण्ड यात्रा के कुछ संस्मरण सुनाये। गांधी हमारे राष्ट्रीय
 
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कर्मयोगी श्रीमती उमराव जैन

महिला शिक्षा को नये अर्थ दिये हैं उन्होंनेउमराव जैन का जन्म 28 सितम्बर 1953 को जोधपुर में हुआ। वे 17 वर्ष की भी नहीं हुई थीं कि उनका विवाह हो गया। उस समय तक उमराव ने हायर सैकण्डरी की परीक्षा दी थी, रिजल्ट नहीं आया था। उमराव के पिता मुनीम का काम करते थे।
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कर्मयोगी डॉ. इदिंरा अग्रवाल

नि:शक्तजन की सेवा के लिये समर्पित था उनका पूरा जीवनप्रख्यात कवियत्री, साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. इंदिरा अग्रवाल का जन्म 27 सितम्बर 1939 को बनारस में हुआ था। उनके पिता श्री चन्द्रशेखर लाल जोधपुर एवं उदयपुर में कार्यरत रहे। शिक्षा पूरी होने पर
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इट हैपन्स ओन्ली इन इण्डिया !

गणतंत्र दिवस पर भी अब बधाई के एस एम एस करने का फैशन चल निकला है। मेरे मोबाइल फोन पर जो ढेर सारे एस एम एस आये, उनमें से एक एस एम एस के शब्द अब तक मेरे मस्तिष्क में चक्कर काट रहे हैं। यह एस. एम. एस. मुझे जोधपुर से ही श्री राजेश शर्मा ने भेजा है जिसमें लिखा
 
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युवाओं को संवदेना विहीन बनाती है रैगिंग!

रैगिंग पाश्चात्य जीवन शैली की कुछ अत्यंत बुरी बुराइयों में से है, जिसे भारतीयों ने कुछ अन्य बुराईयों की तरहजबर्दस्ती ओढ़ लिया है। यह अपने आप में इतनी बुरी है कि हम विगत कई वर्षों से प्रयास करने के उपरांत भी इसेमहाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से समाप्त
 
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खतरे में है बच्चों की मुस्कान!

बच्चा प्रकृति का एक सुकोमल वरदान है। उसकी मुस्कान से पूरी धरती मुस्कुराती है। उसके मुस्कुराने का अर्थ हैकि उसके आसपास सब कुछ सही घटित हो रहा है किंतु मानव सभ्यता अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां बच्चोंकी मुस्कान खतरे में दिखायी देने लगी है। बच्चों की इस
 
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गंदी हो रही है बच्चों की भाषा!

पाश्चात्य दार्शनिकों का मानना है कि बच्चे जिस समय दुनिया में जन्म लेते हैं उस समय उनका मस्तिष्क एककोरी स्लेट के समान होता है जिसमें कोई संदेश नहीं लिखा हुआ होता। बच्चा धरती पर आने के बाद संदेशों कोपढ़ना सीखता है, उन्हें अपने मस्तिष्क में स्टोर करता है,
 
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कर्मयोगी श्री अशोक कन्नौजिया

पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े वेडिंग फोटोग्राफर की ख्याति प्राप्त है उन्हेंक्या कोई व्यक्ति टेलिविजन पर एक समाचार देखकर अपने भाग्य की लकीरों को बदल सकता है! क्या कोई एक समाचार आदमी को गुमनामी के अंधेरों से निकालकर राष्ट्रव्यापी ख्याति दिलवा सकता है!
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संभावना सेठ और राखी सावंत के सामाजिक सरोकार

यह आलेख मैंने कुछ समय पूर्व लिखा था। जिसे दैनिक नवज्योति ने मेरे ब्लॉग में प्रकाशित किया था। जो पाठक इसे नहीं पढ़ पाये थे, उनकी सुविधा के लिये मैं इसे फिर से इस ब्लॉग में प्रकाशित कर रहा हूँ।राज्य के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशक डॉ। अमरसिंह राठौड़ अपनी
 
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कर्मयोगी श्रीमती अरुणा चौधरी

गाँवों को सेवा और साधना का तप:स्थल बनाया है उन्होंनेश्रीमती अरुणा चौधरी का जन्म ई। 1950 में जोधपुर में हुआ। उनके पिता श्री खेताराम गोदारा पंचायत समिति मण्डोर के प्रधान थे। श्रीमती अरुणा छात्र जीवन से ही प्रतिभाशाली रहीं। इसी के साथ वे छात्र नेतृत्व में
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रूपाजीवाएँ सदियों से हैं किंतु वे कभी मुखर नहीं रहीं!

लंदन के लेगटम संस्थान और आब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन ने कौनसे भारत की प्रशंसा की है? क्या उस भारत की जिसमें पाश्चात्य संस्कृति में आकण्ठ डूबा हुआ धनी समाज रहता है और परिवारों ने मुक्त यौनाचरण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है? या उस भारत की जहाँ आज भी
 
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भारत की पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था को बचाना होगा!

लेगटम प्रोस्पेरिटी रिपोर्ट ने भारत को सामाजिक व्यवस्था के मामले संसार का पहले नम्बर का देश बताया है।भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत का समाज कम खर्चीला समाज रहा है। घर, परिवार औरबच्चों के साथ जीना, गली मुहल्ले में ही मिल जुल कर उत्सव मनाना,
 
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कर्मयोगी डॉ. अंजु सुथार

बचपन से ही प्रतिभाशाली रही हैं वे अंजुम तखल्लुस से पहचानी जाने वाली डॉ। अंजु सुथार का जन्म 1 फरवरी 1974 को नागौर जिले के जसवंतगढ़ गांव में हुआ। पिता श्री बजरंगलाल जांगिड़ के राजस्थान सरकार के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में अधिकारी होने तथा उनका
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पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था ही हमारी पूंजी है!

लंदन की लेगटम प्रोस्पेरिटी रिपोर्ट में भारत की परिवारिक व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था की प्रशंसा में बहुत कुछ कहा गया है। वस्तुत: भारत की परिवार व्यवस्था संसार की सबसे अच्छी परिवार व्यवस्था रही है। भारतीय पति–पत्नी का दायित्व बोध से भरा जीवन पूरे परिवार
 
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अधिक पूंजी मनुष्य की सामाजिकता को नष्ट कर देती है!

लंदन के लेगटम संस्थान और आब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन ने भारत को उसके पड़ौसी देशों अर्थात् चीन, पाकिस्तान, बर्मा, बांगलादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान और नेपाल की तुलना में अच्छी प्रशासनिक, सामाजिक एवं पारिवारिक स्थिति वाला देश ठहराया है। इससे हमें फूल कर
 
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