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माणिक की कविता -''बदलते समीकरण ''

Share(विस्मृत  होते महान साहित्यकारों को समर्पित ) जीवन के फलक पर देखा है सभी ने आमद,यौवन और उतार अपनाबुढ़ापे  में बचपन याद आता होगाकभी यौवन में लिखी अधपकी रचनाएँकविता,कहानी और उपन्यासउलझे रहे सदा सेजीवन समीकरणों के
 
माणिक
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अनामिका की नई कविता

Share हे उद्धो ...मत जिरह करोउस छलिया कीजिसने भ्रमर रूप रखहम संग प्रीत बढ़ाईऔर अब हमारीहर रात परपत्थर फैंक करजाता है ...मन को जख्मीकरता है ..हमारे अंतस परउसी का पहरा है.द्रगांचल परजाले बुन दिए हैं ..अपनी लिलाओं के उसने. .हमारे वजूद कीअट्टालिका सेवो
 
माणिक
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सेमिनार रपट -‘‘आयड़ नदी ग्रीन ब्रिज सुधार प्रयोग सराहनीय’’

Shareसिटी पैलेस के दरबार हॉल में आयोजित योजना आयोग तकनीकी व वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करेगा(सेमिनार में उपस्थित गणमान्य नागरिक)  झील संरक्षण समिति द्वारा प्रशासन, यूसीसीआई, स्वैच्छिक संस्थाओं, महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन तथा ग्रामवासियों की मदद
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज रश्मि प्रभा जी

Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा -----------------------------------------रश्मि प्रभा
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज अनामिका जी (सुनीता)

Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा-----------------------------  अनामिका जी
 
माणिक
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कला की दुर्दशा देश में

Shareअफ्रीकी कलाकारों के कार्यक्रम में नहीं रहे दर्शक भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की जयपुर इकाई की ओर से गुरुवार को आयोजित अफ्रीकी कलाकारों का कार्यक्रम दर्शकों की अनुपस्थति की वजह से परवान नहीं चढ़ पाया। महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज सखी सिंह जी

Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा
 
माणिक
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ओ......बाबा कृष्ण....!!संभाल लेना यार मुझको....हम सबको.....!!

इन दिनों कई बार यूँ लगता है कि हम लिखते क्यूँ हैं.....हजारों वर्षों से ना जाने क्या-क्या कुछ और कितना-कितना कुछ लिखा जा चूका है....लिखा जा रहा है...और लिखा जाएगा....मगर उनका कुछ अर्थ....क्या अर्थ है इन सबका....इन शब्दों का...इन प्यारे-प्यारे शब्दों का इन
 
भूतनाथ
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अशोक जमनानी की हाल लिखी रचनाएँ

कहानी - बेचारा रामलालShare             छोटे से शहर का छोटा सा मोहल्ला ऐसी ज़गहों पर तो ख़बर आग की तरह फैलती है; बस फैल गयी। सिपाही रामलाल की लड़की किसी दूसरी जात के लड़के के साथ भाग गई। जिसने सुना
 
माणिक
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विषय सूचि

इस ब्लॉग के ब्लॉगर या लेखक की अनुमति के बिना कोई भी छापी हुयी सामग्री आप कहीं पर छापने कृपा नहीं करें .ये ब्लॉग आपके ही सहयोग से बहुत सदस्यों तक आगे बड़ा है,और आपकी प्रतिक्रियाओं के साथ आगे का सफ़र भी तय करेगा .धन्यवाद
 
माणिक
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युवा रचनाकार अशोक जमनानी से दस सवाल

Shareनमस्ते जी अशोक जीकुछ प्रश्न हैं जिनके उत्तर जानकार  मैं और पाठक वर्ग आपके लेखन को और भी अच्छे से समझ सकेंगे.............आशा करतें हैं की जल्दी ही प्रत्युत्तर मिलेगा. लोग कहते हैं कविता का दौर  ख़त्म  हो गया है,कथा की तूती बोलती
 
माणिक
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अशोक जमनानी की ग़ज़ल- परिंदों लौट आना

Share   परिंदों शाम को लौट आना घर ज़रा ज़ल्दी हम दीवारें इस ख़ामोशी से ऊब जातीं हैंउतने ही दानें चुनो जितनी ज़रूरत है हमें यहां कितनी चोंचें घोंसलों  में रीती आतीं हैंजुगनुओं से कह दो ना रात में चमका करें वो रोशनी महलों की इससे खीज जाती हैउनसे ना
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज रामकृष्ण गौतम जी

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अशोक जैन से माणिक की बातचीत

Shareमाणिक:     आन्दोलन में आपकी शुरूआत।अशोक जैन:    जयपुर में कोलेज  की पढ़ाई के शुरूआती दिनों में स्पिक मैके जहां एक फैशन के तौर पर आया था, उन्हीं दिनों मेरा जुड़ाव हुआ। जब सदस्य होना बड़ी बात होती थी, कुछ मित्रों की
 
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''काव्योत्सव'' में आज कवि कुलवंत सिंह जी

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माणिक
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अशोक जमनानी की लघु कथा: पेटदर्द

Share                 मंत्री जी के पेट में रह-रह कर दर्द उठता। दिन पर दिन बीतते जा रहे थे लेकिन दवा और दुआ दोनों ही बेअसर सिद्ध हो रहीं थीं।अच्छे से अच्छा इलाज़ चल रहा था;
 
माणिक
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जल बचाओ विषय पर दिलीप गांधी की दो रचनाएँ.

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अशोक जमनानी का गीत: ओ पथिक तू चल अकेला

Shareओ पथिक तू चल अकेला कारवां बन जायेगातू समर पर हो समर्पित; तो अमर हो जायेगाना आंसुओं का अर्ध्य  हो न पीर की परवाह होयश की कोई कामना न पथ में शीतल छांव होतू नींव के पत्थर को अपनी आस्था का दान देनिर्माण का हर कंगूरा तुझसे ही जीवन पायेगायह
 
अशोक जमनानी
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एक प्रतिभाशाली कलाकर्मी शिव कुमार गांधी

आज सुबह ही जब डॉ. पल्लव जी का मेल मिला तो मैं वहाँ दी गई वेबसाईट पर गया. पाया कि बहुत ही प्रतिभाशाली कलाकार श्री शिव कुमार गांधी वहाँ थी अपने  काम के साथ  . सोचा क्यों ना उनके बारे में कुछ जानकारी आप तक भी पोस्ट करूँ .यहाँ इस पोस्ट में उनकी
 
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''काव्योत्सव'' में आज नवीन जोशी ’नवेंदु’ जी

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''काव्योत्सव '' रचनाएँ एक जून से

शेयर ब्लॉग्गिंग जगत के सभी साथियों  और पाठकों को अपनी माटी ब्लॉग के सभी सहयोगियों की तरफ से इस ऋतु की बहुत सी शुभकामनाएं,आज से हम ''काव्योत्सव'' आरम्भ कर रहें है.आशा करते हैं कि आपका पूरा पूरा सहयोग  मिलता रहेगा. हमें अभी तक मिली रचनाओं के लिए
 
माणिक
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''काव्योत्सव'' में आज रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति जी

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''काव्योत्सव'' में आज नवीन जोशी ’नवेंदु’ जी

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''काव्योत्सव'' में आज रश्मि प्रभा जी

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''काव्योत्सव'' में आज अनामिका जी (सुनीता)

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माणिक
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साहित्य की नयी विधा -ब्लोग्स

साहित्य की विधाओं का निर्माण जब हो रहा होगा तो उन सभी विद्वत जनो ने सोच भी न होगा कि कंप्यूटर पर भी साहित्य का सृजन होगा । केवल सृजन ही नहीं बल्कि उसका प्रकाशन भी इसी माद्यम से हो सकेगा । इतना ही नहीं पाठक एक दूसरे के साहित्य, लेख निबंध कवितायेँ सभी कुछ
 
Girdhari khankriyal
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bhaktikaal

मध्ययुगीन हिन्दी साहित्य भक्ति आंदोलन और लंबे, महाकाव्य कविताओं की रचना के प्रभाव से चिह्नित है. Avadhi और बृज भाषा बोलियों में साहित्य विकसित की गई थी. Avadhi में मुख्य कार्य मलिक मुहम्मद है Jayasi Padmavat और तुलसीदास Ramacharitamanas
 
ana
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अपने घर का बजट बनाने से क्या फायदा-हिंदी शायरी

गृहणी ने गृहस्वामी से कहा ''आज मैंने महिलाओं की एक किताब में पढा कि घर का खर्च भी बजट बनाकर करना चाहिए'' गृहस्वामी ने कहा ''बजट बनाने के लिए भी कागज़ और पेन चाहिए जो अपने बजट में नहीं आ सकतीं पड़ोस से उधार लेकर अख़बार और किताब जो तुम पढ़कर बढाती हो ज्ञ
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वह एक है, पर नाम अनेक-हिंदी शायरी

हमने पूछा दुनिया के मालिक का पता उन्होने ढोल बजाने वालों का घर बता दिया जो पहुंचे वहाँ सुना शोर तो हमने मालिक को भुला दिया वह है एक पर नाम अनेक डर था की कहीं हम लें नाम उनका कहीं और अधिक शोर न मच जाये अगर कहीं हमने भीड़ से अलग नाम लिया --------------
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स्वार्थों के होते मेहमान-हिंदी शायरी

चेहरे पर है दिखावटी मुस्कान नहीं होता नीयत का भान बदन पर हैं जगमगाते वस्त्र धारण किए दिल में काली नियत लिए भरोसे के लिए निकल रहे हैं शब्द जुबान से निरंतर विश्वास और धोखे का मालुम नहीं अन्तर मन की आंखों से पढोगे जब उनको उनके शब्दों के अर्थों का अर्थ स
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तब बदल जायेगा परिदृश्य-हिंदी शायरी

रात्रि के शीतल पलों में चन्द्रमा की हल्की रोशनी में देह पर धवल वस्त्र चारों और बिखर रही इत्र की खुशबू हाथों में गुलाब लिए प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए निकला है वह कितना सुन्दर लगता है दृश्य पर जब सूरज चमकेगा अपनी अग्नि से धरती को प्रज्जवलित करेगा अपनी
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दीवारों पर लिखे सत्य पढे नहीं है-हिंदी शायरी

रिश्तों में अब कोई दरार नही है क्योंकि अब लोगों के दिलों में अब उनके लिए कोई जगह बची नहीं है भाई और भाई के बीच अब कोई दीवार नहीं खड़ी नही रह सकती क्योंकि रिश्ता रह गया है जैसे हवा में लटकी तख्ती नफ़रत जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि समय के कमी की वजह से क
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क्षितिज

कविता -------------हत्यारे  नहीं  देखते  स्वप्न--------------------------------हत्यारों  के  चेहरों  पर होती है विनम्र  हंसी हत्यारे  कभी हत्या नहीं  करते हत्यारे निर्भय  हो
 
kshitij --govindmathur
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