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पहेली 33

नापता है पर तोलता नहींकाटता है पर मारता नहींसीता है पर राम नहींमहिलाओं का यह काम नहींयदि होती महिला तो होती दर्जनइसके बिना न हम दिखते सज्जनअब आप ही सुलझाओ मेरी उलझनये न हो तो न हो सुंदर जीवनसिएटल । 425-445-08275 मार्च 2010
 
Rahul Upadhyaya
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पहेली 32

उतारे जाते हैं ये हर रात सोने के वक़्त और वहाँ भी जहाँ एकत्रित होते हैं ईश्वर के भक्त उतरवाए जाते हैं ये रोज़ ताकि हो सके सुरक्षा का प्रबंध और कभी-कभी अपने आप ही उतर जाते हैं ये जब दिखाई दे जाता है राजनेता सशक्त न नशा न घमंड न जादू है ये फिर क्या हैं य
 
Rahul Upadhyaya
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पहेलियाँ

पिछले वर्ष की तरह इस बार भी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर प्रस्तुत हैं कुछ पहेलियाँ। पहेलियों के उत्तर से 'शुद्ध हिंदी' वालों को आपत्ति हो सकती है। क्योंकि कुछ शब्द या तो उर्दू के हैं या अंग्रेज़ी के - शुद्ध हिंदी के नहीं। या ये कहूँ कि उनकी जड़ संस्कृत में
 
Rahul Upadhyaya
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पहेली 28

खिलते हैं फूल बिखेरते हैं रंग गाँव-गाँव गली-गली उड़ती है पतंग इसके होते ही शुरू होता है शरद का अंत इस पर लिख कर गए कवि निराला और पंत मंदबुद्धि मैं और आप अकलमंद आप ही सुलझाए मेरे मन का ये द्वंद बस के पीछे तो होता है बस काला धुआँ फिर इसका नामकरण क्यों ऐ
 
Rahul Upadhyaya
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