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क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?

"क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?"पूछा था उसनेऔर मैं जवाब तुरंत नहीं दे पाया थादेता भी कैसे?अगर कभी किसी ने मुझसे प्यार किया होताया मैंने किसी सेतब तो मुझे पता भी होता किप्यार किस चिड़िया का नाम है"किस सोच में पड़ गए?जल्दी बताओ, तुम मुझसे प्यार करते हो या
 
Rahul Upadhyaya
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दूसरों का साथ

मैंने बूढ़ी काकी से पूछा,‘‘हमें दूसरों की जरुरत क्यों पड़ती है?’’काकी बोली,‘‘देखने में सवाल कितना सरल है। उत्तर तलाशने की जरुरत है जो उतना सरल नहीं। कुंए का तल छूने वाले कम होते हैं जबकि पानी कोई भी पी सकता है। मैंने हमेशा गहराई से विचार किया है।’’कुछ समय
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पास दूर

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन
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ये रिश्ते, जाने-अनजाने

आपने ये महसूस किया है कि हममें और आपमें एक सनक रहती है ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की। लेकिन ये पैसा एक सीमा के बाद मायने नहीं रखता। कई लोगों के पास ढेर सारा पैसा है, लेकिन खुशी का दो शब्द बोलनेवाला कोई नहीं होता। अंतिम समय में कोई ऐसा नहीं होता है, जो
 
prabhat gopal
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मैंने मोहब्बत की है

मैंने मोहब्बत की है और अनेकों से की हैजिसकी सज़ा मुझे बरोबर मिली हैकहता था मैं महबूब जिनकोपाता हूँ आज मैं दूर उनकोऐसा नहीं कि मोहब्बत में कमी थीबस फ़क़त एक की वो जागीर नहीं थीदुनिया को मोहब्बत से भली रंजिश लगी हैइसीलिए तो हो एक से ऐसी बंदिश नहीं हैझूठ कहती
 
Rahul Upadhyaya
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एक था पेड़

एक था पेड़जो लहलहाता था आंगन मेंअब जल रहा हैमेरे फ़ायर-प्लेस मेंएक था पशुजो विचरता था बाग मेंअब पक रहा हैमेरे किचन मेंएक थे पूर्वजजिनकी अस्थियाँबन के जीवाश्म ईधनजल रही हैंमेरी कार मेंऊर्जान बनती हैन मिटती हैसूत्र यही सोच करकरता हूँ मन शांत मैंसिएटल ।
 
Rahul Upadhyaya
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जब तुम आई थी

जब तुम आई थीतब कुछ कोपलें उग आई थीऔर वसंत का आगमन हुआ थाअब वो फूल बन गई हैंऔर शूल सी चुभती हैतुम मेरे कितने पास थीऔर मैं तुमसे कितना दूर!***कहा था किफिर मिलेंगे हमलेकिनजैसे मिले थे कलक्या फिर मिलेंगे हम?***झूठ है कि जीवन क्षणभंगुर है!तुम चंद पलों के लिए
 
Rahul Upadhyaya
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अर्थ को खोजते हुए शब्द !

उसने मुझे हमेशा के लिये छोड़कर जाते हुए कहा "अपना ख़याल रखना !" वो चली गयी । फिर ना कभी आने के लिये । ये उसके कहे हुए अंतिम शब्द थे । तब लगा कि वह कुछ शब्द दे गयी है जो मुझे अपने पास रखने हैं और उनकी हिफाज़त करनी है । उन शब्दों के गूढ़ रहस्यों को जानने के
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शादी है एक ऐसा अजूबा

शादी है एक ऐसा अजूबाजो अच्छे-खासे को एक दिनबना दे नमूनाबना देटाईगर को बिल्लीऔरबीवी को टाईगरजो देता था फूलवो लगता है 'फ़ूल'दुनिया के आगेकर के भूल कबूलमानो प्राईमरी का बच्चालिखे ब्लैकबोर्ड पे दस बारमाफ़ करे मिस!मैं करूँगा होमवर्क हर बारसिएटल । 425-445-082724
 
Rahul Upadhyaya
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सोचता था

सोचता थातुम मिलोगीतो ऐसा होगातुम मिलोगीतो वैसा होगाघंटों हम बातें करेंगेएक-दूसरे को निहारा करेंगेचुप न रहेंगेखूब हँसेंगेंएक-दूसरे की टांग खींचेंगेंलेकिन तुमआई-फोन में घुसी रहीऔर मैंब्लैकबेरी से चिपका रहादिन ढलाऔर रात हुईदिल से दिल कीन बात हुईतुम चलीऔर
 
Rahul Upadhyaya
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किस्सा टाईगर का

जो आसमां से गिरती है उसे कहते हैं बर्फ़ जो उठता है सीने से उसे कहते हैं दर्द स्मृतियों में जो अक्सर हो जाते हैं दर्ज़ किस्से जनाब होते हैं सौ फ़ीसदी सर्द टाईगर के जीवन में आए होगे कई सुनहरे क्षण लेकिन याद रहेगा उसे वो थेंक्सगिविंग का पर्व जब बीवी ने घुम
 
Rahul Upadhyaya
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मैं आब हूँ, मगर …

मैं आब हूँ मगर बेताब नहीं हूँ आपे से बाहर हो जाऊँ इतना बदहवास नहीं हूँ कि उठूँ और उठ के सबको डूबो दूँ मैं सर से कदम तक लबलबाता सैलाब नहीँ हूँ मैं सोता हूँ बहता हूँ गुज़रता हूँ बागों से हरी-भरी क्यारियोँ में मिलता हूँ प्यासों से मैं आब हूँ मगर तेज धार
 
Rahul Upadhyaya
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गुल खिलाना है बाकी

अभी लाश नहीं हूँअभिलाषा है बाकीचाहा है तुमकोतुम्हें पाना है बाकीदिल में मेरे तुमकब से बसे होआँखों से आँखेंमिलाना है बाकीआते ही रहते होख़्वाबों में हर दिनरातों में उनकाआना है बाकीसबसे हसीं तुमजग में सनम होहाथों से तुमकोसजाना है बाकीबागी नहींबागबां है
 
Rahul Upadhyaya
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God's Gift ...

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जबसे वो कमाने लगे हैं

जबसे वो कमाने लगे हैं आँखें हमें दिखाने लगे हैं गुरूर तो कुछ पहले भी था अब धौंस भी जमाने लगे हैं डर है कहीं बिगड़ जाए न वो बनाने में जिसे ज़माने लगे हैं अहसान जो किए थे हमने उनपे धीरे-धीरे सब याद आने लगे हैं वो फोन भी नहीं उठाते हमारा हम नखरें उनके उठा
 
Rahul Upadhyaya
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