माना तुम्हें शहर ने जगमग जगमग रातें दी होंगी
भरा-भरा सा दिन लगता है लेकिन खाली-खाली शामकहाँ गयी चौपालों वाली बतियाती मतवाली शाम घर जाने का मन होता था मन में घर आ जाता था शाम ढले ही इंतजार में खुलती खिड़की वाली शाम सारे दिन की थकन मिटाती गय्या जैसी लगती थी आँगन के पीपल के नीचे करती हुई जुगाली शाम
May 18 2010 02:01 PM



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