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दो दिन सात सत्र ३२ घंटे, डूबा रहा मैं कवि संगम में. (एक Report)

वन्दे मातरम् का नारा है तिरंगा हमको प्यारा है जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमे रसधार नहीं वो ह्रदय नहीं है पत्थर है जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं और...... जो वक़्त की आंधी से खबरदार नहीं है वो कुछ और ही है वो कलमकार नहीं है राष्ट्र जारण धर्म हमारा... जी