पसंद करें
4
नापसंद करें

अदालती फ़ैसलों के निहितार्थ : लिव इन रिलेशनशिप , बलात्कार आदि के परिप्रेक्ष्य में

मैंने बहुत बार अनुभव किया है कि जब समाचार पत्रों में किसी अदालती फ़ैसले का समाचार छपता है तो आम जन में उसको लेकर बहुत तरह के विमर्श , तर्क वितर्क और बहस होती हैं जो कि स्वस्थ समाज के लिए अनिवार्य भी है और अपेक्षित भी । मगर इन सबके बीच एक बात जो बार बार
 
अजय कुमार झा
टैग: rape
पसंद करें
2
नापसंद करें

अगर नहीं लड़ेंगे, तो वो हमें नक्सली बताकर जेल भेज देंगे

निरीह पर निशाना [20 jan 2010 | Read Comments | ] कृपाशंकर चौबे ♦ रिहा होकर 18 साल की सुलेखा घर तो पहुंच गयी लेकिन उसका जो यातनामय समय महीनों कारागार में बीता, उसका हिसाब कौन देगा? Read the full story »संघर्षरत टिप्‍पणीकार [19 jan 2010 |
 
अविनाश