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वसंतोत्सव

काशी विश्वविद्यालय यही है वह जगह जहां नामालूम तरीके से नहीं आता है वसंतोत्सव हमउमर की तरह आता है आंखों में आंखे मिलाते हुए मगर चला जाता है चुपचाप जैसे बाज़ार से गुज़र जाता है बेरोजगार एक दुकानदार की तरह मुस्कराता रह जाता है फूलों लदा सिंहद्वार इस बार वसंत
 
अफ़लातून
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जहाँ चुक जाते हैं शब्द : राजेन्द्र राजन

शब्दों में शब्द जोड़ते मैं वहाँ आ पहुंचा हूं जहां और शब्द नहीं मिलते मैं क्या करूँ अब मैं कैसे लिखूं समय के पृष्ट पर अपनी सबसे जरूरी कविता शब्दों में शब्द जोड़ते जहां चुक जाते हैं शब्द मैं क्या करूं ? क्या मैं वहीं खुद को जोड़ दूं ? मगर क्या अपने शब्
 
अफ़लातून