पसंद करें
1
नापसंद करें

मंहगाई है जनता का भाग्य !!!

आखिरकार वह वक्त आ ही गया,सरकार ने माना मंहगाई है,कवायद शुरू हो गई,मंहगाई कम करने की नहीं,इल्जाम लगाने की एक दूसरे पर,विरोधी पक्ष ने बात पकड़ ली,तो फिर सब मिल गए,मंहगाई की बात फिर गए भूल,जनता का भाग्य जब यही है,तब सरकार क्या करे?
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: price rise
पसंद करें
1
नापसंद करें

चालीस साल पहले

चालीस साल पहले, जिंदगी बहुत आसान थी, हमने ३२५ बेसिक पर शुरू की थी, केंद्र सरकार में नौकरी, तीन कमरों का मकान था, सब कुछ बहुत सस्ता था, आना-जाना, खाना-पीना, मन में कोई तनाव नहीं, जिंदगी जीते थे तब. फिर देश ने तरक्की की, जिंदगी मुश्किल होने लगी, अब देश
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: price rise
पसंद करें
0
नापसंद करें

चालीस रुपये का सेब

एन ऐपल ए डे कीप्स डाक्टर अवे,मास्टरजी ने पढाया बच्चों को,पर खुद गड़बड़ा गए,एक सेब चालीस रुपये का,घर में पांच जन,दो सौ रुपये के सेब हर दिन,काफी महंगा हो गया है,कहावतों को जीवन में चरितार्थ करना.दाल रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ,एक बच्चा बोला,गुरूजी पहले खुद
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: price rise