पसंद करें
3
नापसंद करें

हे परमपुरूषों बख्शो..., अब मुझे बख्शो... -- सुश्री अरूणा

क्रिएटिव मंच पर आप का स्वागत है !इस मंच के शुरआती दौर से ही हमने हिंदी व् अन्य भाषाओँ के चर्चित लेखक / लेखिका की चुनिन्दा रचनाएँ आप के समक्ष प्रस्तुत करते रहे हैं ! इसी श्रृंखला के अंतर्गत आज प्रस्तुत हैं -'सुश्री अरुणा राय की छह बेहतरीन कवितायें'आशा है
 
क्रिएटिव मंच-Creative Manch
टैग: Poems
पसंद करें
5
नापसंद करें

मत बांधिए उसके अन्दर की आग को -- 'ऋतू पल्लवी'

क्रिएटिव मंच पर आप का स्वागत है !इस मंच के शुरआती दौर से ही हमने हिंदी व् अन्य भाषाओँ के चर्चित लेखक / लेखिका की चुनिन्दा रचनाएँ आप के समक्ष प्रस्तुत करते रहे हैं ! इसी श्रृंखला के अंतर्गत आज प्रस्तुत हैं -'डा० ऋतु पल्लवी की पांच बेहतरीन कवितायें'आशा है
 
क्रिएटिव मंच-Creative Manch
टैग: Poems
पसंद करें
1
नापसंद करें

(कविता) -वसीयत

Shareलिख दी है वसीयत मेंने बेटे बेटी के नाम आज बढ़ा चढ़ा के क्या लिखूं अभी तलक का कमाया ही साफ़ लिख दिया है करीने से खुद ही सफेद पाठे पर नीली स्याही सेबँटवारा बराबरी का किया है मैंने लड़ने की बात रखी ना बाकीबड़े को ब्लॉगर,बेटी को ऑरकुटपत्नी
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

सच का सामना

अनजाने सफ़र सी कट गयी उम्र,अब तलक तो,कई बार फ़रक दिखता रहा साफ़ साफ़,महल और झोपडपट्टी का,अंग्रेजी के पिछे भागते भागते,जीवन की बाहरखडी भूल गया है आदमी,कोई धन के नशे में तो कोई जीवन की आपाधापी में,देख शहर की बस्ती को,रूमाल नाक पर टीकाता है आदमी,गन्दे नाले
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

नंगजीराम

मेरी चिथडा चिथडा ,बेस्वाद और संकडी कहानी में अपने,लिखा है बहुत कुछ,तपती धरती,झरता छप्पर,घर,पडोस,या फ़िर खेत-खलिहान,कुन्डी में नहाते ढोर लिखे है कोने में कहीं,बेमेल ही सही पर शामिल तो किया,कम तौल कर कमा खाता ,गांव का बनिया भी खुदा ने,वार तेंवार की साग
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

अधपका जीवन

आधी उम्र गुज़र गयी तो,लगा अधपका जीवन यूं,कभी पहाड सा तो कभी,अपने खेत के सामने वाले,प्राईमरी स्कूल सा,उबड खाबड भी लगा,तो कभी रपटीले रास्तों सा,लगा कभी मुझे वो,दो के पहाडे सा सरल,तो कभी बुज़ुर्गों की बातों सा,पुराना और बेकार भी,जानता हुं उम्र कच्ची है
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

सफ़रनामा

रातों रातों किये सफ़र की,दिनभर कहानी लिखता रहा,धडों मे बंटी देख धरती को,शुरू में ही खत्म हुआ सा,कभी लगा,बैरंग आये खत सा,अपनी अपनी पगडण्डी पर,जाते देखे सबको न्यारे,आ गई इठलाती मशीनें सडकों पर,कोने में रोते हैं खेत यहां,मानसरोवर सी यात्रा को,हवाई ज़हाज में
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

अज़ीब करवट

बरसों बीते जिस जीवन में ,उससे पलटी मार रहा हूं,सीधे रास्ते पसन्द नही अब,अब पगडण्डी नाप रहा हूं,अनजानों मे खोया सा,अपनेपन की चाह लिये,असली मतलब भूल गया हूं,नकली प्यारा-प्यारा है,चल पडा़ है सारा जीवन,जहां नींद नही बस करवट है,बेमतलब की भागादौड़ी,खून के
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

रंग जीवन के

कविता बात छिड़ी है रंगों की तो,जीवन रंगी पाया है,कुछ अपने,कुछ पड़ौसवाले,कच्चे,पक्के और चमकीले,रंगों का बादल छाया है,आंखों के आगे,आज फ़िर से,याद आये रंग बिछुड़े हुये बरसों के,पर सतरंगी दुनियादारी है,सतरंगी रहा कभी आसमां भी,रंगबिरंगी इस धरती के,रंगों
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

गांव

गांवसूखे और सड़ेगले पत्तों से,ढ़की है राह जिसकी,टोह तक ना ली बरसों से अखबार ने जिनकी,दुबका हुआ,ढ़केला सा,कोने में छुपा हुआ पाया कभी,साफ़ सुथरे कागज़ पर,काला काला सा,अपना गांव लिखा है मैंने आज़ फ़िर से ऐसा ही,है सच्चाई सबकुछ,झुठ नहीं है कुछ भी,बस्ती और
 
माणिक
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

ये दिल्ली है मेरे यार...

दिल्ली प्रतीक है... उन उत्तेजनाओं की - निर्माण किया जिन्होंने इसका ; उन संतुष्टियों की - सहेजा हमारे लिए जिन्होंने इसको ; उन शक्तियों की - देश चलाती हैं जो; उन् मेधाओं की - भविष्य की कुंजियाँ हैं जो; उन घमंडों की - बोझ होने पर भी लादे है जिनको ; उन द
टैग: Poems
पसंद करें
1
नापसंद करें

मेरी पर्पल ड्रेस

कल मुझको पर्पल ड्रेस पहनकर जाना है स्कूल; चलकर अभी दिलादो मुझको वरना जाओगे तुम भूल; सब बच्चे यही रंग पहनकर कल स्कूल में आयेंगे; मैं ऐसे ही जा पहुँची तो मुझको बहुत चिढ़ायेंगे इस दिन का महत्त्व है कि ये रंग का भान कराता है; खेल खेल में हम बच्चों को नई
टैग: Poems
पसंद करें
7
नापसंद करें

अनीता वर्मा की बेहतरीन कवितायें

प्रस्तुति : अनंत सुश्री अनीता वर्मा परिचय अनीता जी रांची में रहती हैं । बेहद संवेदनशील और सचेत यह लेखिका मुझे अपनी अथक जिजीविषा से बहुत प्रभावित और आकर्षित करती रही हैं। पिछले कई सालों से दुर्भाग्यवश उनका स्वास्थ्य बहुत ज़्यादा खराब रहा है और पता नही
 
क्रिएटिव मंच
टैग: Poems
पसंद करें
6
नापसंद करें

इला जी की उत्कृष्ट कवितायें

सुश्री इला कुमार परिचय 1 मार्च 1956 को मुज़फ्फरपुर - बिहार में जन्म . एम् . एससी . ( फिजिक्स ), बी . एड . तथा एल . एल . बी . कुछ वर्षो तक अध्यापन . तीन वर्ष सिंहभूम के आदिवासी जन - जीवन का विशेष अध्ययन . कविताओं और कहानियों के अलावा शैक्षिक , सामाजिक
 
क्रिएटिव मंच
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

रोजाना

कविता) देखिये जनाब, आज का दिन, फिर ऐसे ही गुजर गया, मै सुबह उठा, चाय, सिगरेट, अखबार, यानी वही सब रोजाना के बाद, मै यही सोचता रहा, कि आख़िर ऐसा कब तक चलेगा !! ******************************** फिर जनाब मै दफ्तर गया, फाइल, दस्तखत, साहब की झिड़की, यानी क
 
प्रकाश गोविन्द
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

दो कवितायें

मूक प्रश्न - (कविता) बीजगणित के "इक्वेशन" भौतिकी के "न्युमैरिकल" और जैविकी की "एक्स्पैरिमेंट्स" से परे भी, एक दुनिया है भूख और गरीबी से सनी हुयी ! वहीँ मिलूँगा मैं तुम्हें यदि तुम मेरे मित्र हो तो आओ इस इक्वेशन को हल करें कि क्यों मुट्ठी भर लोग करोड़
 
प्रकाश गोविन्द
टैग: Poems
पसंद करें
1
नापसंद करें

अग्निशेखर जी की मर्मस्पर्शीय कवितायें

अग्निशेखर परिचय कश्मीर के विस्थापित कवि, जो अलग रहते हुए भी कश्मीर को अपने दिल से कभी जुदा ना कर सके, अतः कश्मीरी साहित्य को विश्व के सम्मुख लाने मे संल्लग्न हैं । हिन्दी में तीन कविता संग्रह हैं : किसी भी समय , मुझसे छीन ली गई मेरी नदी , कालवृक्ष की
 
क्रिएटिव मंच
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

Repentment

Today sitting in my room I let myself loom,I try to think aboutthe things I wanted and I got,but feel, for them too much has been lost.When calculated,high comes the living of cost,but still,to add my precious time and effort, I forgot,And forgot,the
 
Tanumoy Bose
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

SMILES

Caught in darkness,but happy I am,Outside is bright a lot.Walking on lanes,I fall,quickly I get up,because I dont want to be stamped at all।Studying,is tough for me,but I try my hands on it; they crawl।People laughed,when I did pole dance with a stick
 
Tanumoy Bose
टैग: Poems
पसंद करें
0
नापसंद करें

दरमियां .................

अब कोई बात न होगी हमारे बीच ... वो अपने गुनाहों से पशेमां होठों से लफ्ज़ों को भींच मैं उसकी खताओं से परेशां उसकी नासमझी पर खीज अब कोई बात न होगी हमारे बीच ..... इधर मेरी नाराजगियां रंजिश से उपजती नफरत उधर शर्म की खामोशी और न माफ़ी की कोई गुंजाइश अब कोई
टैग: Poems