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सोच रहा हूँ राष्ट्रपति बन जाऊं

कल अखवार पढ़ कर,फिर मन में आया,क्यों न राष्ट्रपति बन जाऊं?एक बार पहले भी आया था मन में,जब हाईवे टोल पर एक बोर्ड पढ़ा था,राष्ट्रपति की कार को टोल नहीं देना,राष्ट्रपति बने और फुर्र से निकल गए,वर्ना खड़े रहो लाइन में और पैसा भी दो,अब एक और पर्क मिला
 
Suresh Chnadra Gupta
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