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आज का सच

इच्छाओं में वृद्धि, आमंत्रण है तनावों को, क्योंकि चाही गयी हर इच्छा पूर्ण नहीं होती, पर अगर यूँ कामनाओं, आकांक्षाओं को न बढाएं, तो लगता है कि वक्त से कहीं पीछे चल रहे हैं! कहीं औरों से पिछड़ न जाएँ, का डर संतुष्ट नहीं रहने देता ! ऑंखें बंद कर झांक कर
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रामकली जी

एक साधारण दिखने वाली वृद्धा जिसे अपने बच्चों की बड़ी फिक्र है, जब अपनी बेटी से अरसे बाद मिली तो उसकी आंखें भर आयीं। ढलती उम्र में भी पूरे जस्बे के साथ जीने वाली रामकली जी बहते प्रेम को न रोक सकीं। बातें हुईं, कल की, आज की और आजकल की।रामकली जी स्वभाव से
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