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आज का सच
इच्छाओं में वृद्धि, आमंत्रण है तनावों को, क्योंकि चाही गयी हर इच्छा पूर्ण नहीं होती, पर अगर यूँ कामनाओं, आकांक्षाओं को न बढाएं, तो लगता है कि वक्त से कहीं पीछे चल रहे हैं! कहीं औरों से पिछड़ न जाएँ, का डर संतुष्ट नहीं रहने देता ! ऑंखें बंद कर झांक कर
Apr 29 2010 03:31 AM



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