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फिर आ गई छब्बीस जनवरी

फिर आ गई छब्बीस जनवरी,फिर निकलेगी राज मार्ग पर,जो परेड हर साल निकलती,थके ऊंघते नेता दर्शक,मजबूरी में आना पड़ता,राष्ट्रीय कर्तव्य हमारा,हर साल दिखावा करना पड़ता,थकी थकी राष्ट्रपति महोदया,हाथ उठाओ, हाथ गिराओ,प्रथम नागरिक के जीवन में,सबसे कठिन यही एक दिन
 
Suresh Chnadra Gupta
टैग: parade on rajpath