jhonka hawa ka...
वो अकेला ही चढ़ता जा रहा हैउन पैरों के निशान साथ लिएजो उससे पहले यहां से गुजरे थेदेख उसे बस यही लगता है 'माना कि दुनिया मुझसे आगे हैपर कभी तो मिलेगी मेरे हिस्से की मंजिलउस मंजिल पे पहुंचना ही क्या मेरे लिए किसी जीत से कम होगा'इंसान क्या नहीं कर सकता
Feb 06 2010 02:48 PM



Shuffle








