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धुंधले पड़ गये हैं शब्द

काफी बूढ़ा हो चुका हूं। कहते हैं,‘कमजोरी बुढ़ापे की निशानी है।’ मैं लगातार चल नहीं सकता। थोड़ी दूरी पर किसी सहारे की जरुरत पड़ती है। बुढ़ापे को सहारा चाहिए। टांगे जबाव दे चुकीं, डर है कहीं लड़खड़ा कर गिर न जाऊं। तब बुढ़ापा और दुश्वार हो सकता है। मुझे पता है
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अरे भैया ! यहां कब हुआ था चुनाव ?

चुनाव हुआ कहीं और अखबार कह रहा है कहीं और !!!जी हां. यही तो खबर है आज ( शुक्रवार 11 सितम्बर 2009) के दैनिक हिन्दुस्तान के मुख्यपृष्ठ पर .दिल्ली के द्वारका विधान सभा क्षेत्र में 10 सितम्बर को उपचुनाव हुआ था. उस चुनाव के बारे में अपने पहले ही पन्ने पर एक
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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डाइपरात्मक रोल

खबरें खराब हैं, उसके लिए जो रोज छापता हैं खबरें। एक विख्यात अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने घोषणा कर दी है कि प्रिंट मीडियम के दिन अब गिने चुने हैं। अमेरिका में लगातार किसी ना किसी अखबार के बंद होने की खबर आ ही रही है। आनलाइन पाठकों की [...]