मणियाँ
फूलों की बगिया ज्यों किश्तों में खिलती है इंसां की किस्मत भी किश्तों में जगती है भला छाते ही बादल कहीं बरखा भी होती है अरे होने-बरसने में इक उम्र गुज़रती है मिलना-बिछड़ना, व हँसना व रोना इन के ही मिश्रण से शख़्सियत निखरती है जब आता है संकट, हम खुद को पर
Nov 20 2009 07:10 AM



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