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मेरा महबूब !

सूक्षम का शिखर ,नजाकत की लहर ,कयामत का कहर ,मेरा महबूब !सूरज का मीत ,सितारे सा शीत ,रौशनी की जीत ,मेरा महबूब !सागर का नीर ,धरती का धीर ,पातळ का आखीर ,मेरा महबूब !चन्दन की महक ,कोयल की चहक ,हिरन की सहक ,मेरा महबूब !हीरे की चमक ,नूर की दमक ,अम्बर की धमक
 
sanjeev kuralia
टैग: nazam