Namaz नमाज़ को उसकी सम्पूर्णता में अदा करना ही इनसान को उसकी मन्ज़िल तक पहुंचाने का एकमात्र मार्ग है।
हे पैग़म्बर! जब आपसे मेरे बन्दे मेरे बारे में पूछें तो उन्हें बता दीजिये कि मैं तो क़रीब ही हूं। मैं सुनता हूं पुकारने वाले की पुकार जब वह मुझे पुकारता है सो उन्हें चाहिये कि वे भी मेरी पुकार पर ध्यान दें ताकि वे सफलता का मार्ग पा जायें। - अलकुरआनपरमेश्वर
Jun 05 2010 06:24 PM



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