hindigen
नारी का एक और सच ! जीवन समर्पित किया बचपन से बुढ़ापे तक बेटी बनी,एक गर्भ से,एक घर में, जन्म लेकर पली बढ़ी सब कुछ किया.पर कही पराया धन ही गयी.बेटा सब कुछ पा गयाउसको कहा--ऐसा 'अपने घर ' जाकर करना ये मेरे वश में
Feb 22 2010 12:33 PM



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