"माँ बूढ़ी है"
"माँ बूढ़ी है" माँ बूढी़ है - कविता वाचक्नवीझुककरअपनी ही छाया केपाँव खोजतीमाँ केचरणों मेंनतशिर होने कादिन आने से पहले-पहले ;कमरे से आँगन तक आकरबूढ़ी कायाकितना ताक-ताक सोई थी,सूने रस्तेबाट जोहतीधुँधली आँख, इकहरी कायाकितना
May 09 2010 06:30 PM



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