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कब तक केवल मुसलमान पकड़े जाते रहेंगे?

जिन्‍हें माओवाद का मतलब समझ में नहीं आता… [16 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ काठमांडो से प्रकाशित अंग्रेजी साप्ताहिक ‘दि टेलीग्राफ’ ने नेपाल के कुछ बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों से जानना चाहा था
 
अविनाश
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नितिन गडकरी के प्रस्ताव पर सभी पक्षों को सद्भावना से विचार करना चाहिए

दरअसल ऐसी ही सोच की जरूरत है। नितिन गडकरी द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में दिए गए वक्तव्य की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। समन्वय, सामंजस्य से ही देश को एक रखा जा सकता है। पहली बार किसी राष्ट्रीय राजनेता ने जोडऩे की बात कही है। यह बहुत पहले हो जाना
 
डॉ महेश सिन्हा
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