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समुद्राएवढी आई आणि अलिबाग ( On Beach with My Mother )

आई तर समुद्राएवढी असते. पण समुद्राएवढ मोठेपण असणाऱ्या माझ्या आईने तिच्या उभ्या आयुष्यात समुद्रच पहिला नव्हता. आपल्या आईने अद्याप समुद्र पहिला नाही याची मला कोणतीही जाणीव नव्हती. ( My mother is another image of sea. But she never visit a sea in her life.)
 
vijayshendge
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मातृत्व की विरासत

माँ, क्या कभी भी बड़ी हो पाती है अपने बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ? क्यों उसके अन्दर आधुनिक जमाने की समझदारी नहीं आती? बड़े होकर बच्चे अपनी अपनी राह पकड़ कर चल देते हैं वे आगे चले जाते हैं अपनी जिन्दगी जीने माँ को पीछे छोड़कर। माँ जानती है इस बात को शुरु से
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मां के स्वरूप को जानने के लिए मृत्यु तक प्रतीक्षा करनी होगी..

आप मां के लिए किस लब्ज का प्रयोग करेंगे। किस शब्द का सहारा लेंगे। मां की कोख से उपजा एक फूल कल उसके खिलाफ ही आवाज बुलंद करे, तो उस पर क्या बीतती है, ये एक मां के दिल से ही पूछना चाहिए। मेरी मां मेरे लिये सबकुछ है। हर किसी के लिए मां का स्वरूप व्यक्तिगत
 
prabhat gopal
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माँ - अहसास भीतर का

(सुनते हैं आज माँ दिवस है )तुलसी चौरे पर हर सांझ दीप जलाती मेरी माँदिनभर गृहस्थी की फटी गुदड़ी में ,पैबंद लगाने की अपनी सारी जद्दोज़हद के बाबजूद, अतीत के बक्से से निकालकर सुख की चादर लपेट लेती है ।सर्वे भवन्तु सुखिनः .... उसकी प्रार्थना के स्वरों मेंघुल
 
मोना परसाई "प्रदक्षिणा"
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संबंधों के दायरे में

कभी-कभी काकी को लगता है कि वह मुझसे घृणा क्यों नहीं करती? उसे यह अटपटा लगता है। काकी को मुझसे लगाव है, यह मैं जानता हूं। उसकी बातों को मैंने बारीकी से समझाया और पाया कि वाकई बुढ़ापा अनुभव लिए होता है।समय के साथ-साथ बूढ़ी काकी का मोह मेरे प्रति बढ़ता गया।
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आप सबका शुक्रिया,लेकिन आज मेरा जन्मदिन नहीं है

मेरे पैदा होने के पहले ही मोहल्लेभर की चाचियों-दादियों ने मेरी मां की पेट का मुआयना कर लिया था। मां का पेट ढोल जितना बड़ा नहीं हुआ था,आठवां महीना होने के बाद भी। इसलिए सबों ने मिलकर घोषणा कर दी कि लड़की ही होगी। मां कहती कि होगी तो होगी,काहे लड़की अदमी
 
विनीत कुमार
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मनुष्य अपनी ही बनाई व्यवस्था के सामने इतना विवश हो गया है?

न्या यालयों का बहिष्कार 90 दिन पूरे कर चुका है। इस बीच सारा काम अस्तव्यस्त हो चला है। बिना निपटाई हुई पत्रावलियाँ, कुछ नए काम, कुछ पुराने कामों से संबंधित छोटे-बड़े काम, डायरी आदि।  अपने काम के प्रति आलस्य का एक भाव घर कर चुका है। लेकिन लग रहा ह
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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ये मां है ....

पहली हलचल से पहली धड़कन तक पहली साँस से पहले कदम तक पहले शब्द से पहली शिकायत तक पहली हंसी से पहले आंसू तक। किसी का परिश्रम है, अनवरत, असाधारण और निष्काम। अनवरत इसलिए कि, नन्हा सा असक्षम जीवन निर्भर है किसी पर, जीवन की हर प्रक्रिया समझने के लिए और दुन
 
राकेश
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The silence also is spitefully still.

Deadly Silence(1)They go, they come, go and come again,you're not sure, it seems ever so quietly,and suddenly in the peace of my songsagain, the siren screams, shrill annoying.I listen to: whether they are more daring,my cell is once again threatened?On
 
P.V.Sri Rangan
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मां का दिल ऐसा ही होता है

मेरी मां को मेरी फिक्र रहती है। हम कहते हैं,‘माओं के दिल ही ऐसे होते हैं।’ एक मां को चाहिये ही क्या, उसके बच्चे सुखी रहें और परिवार भरा-पूरा रहे। हम अपनों की चिंता शायद न भी करते हों, लेकिन उन्हें पल-पल हमारी चिंता रहती है। मां की बात में सुनता हूं,
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