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जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ

जब कभी अपनों की आँखों में आंसू देखता हूँ, मेरा दिल भी रोने लगता है. तड़प हो उठता है मेरा मन. जी करता है मैं भी जार-जार रोऊँ...आज भी मैंने एक अपने बहुत अजीज को रोते हुए देखा. हुआ कुछ यों की दिल को उनके बहुत ठेष लगी, आँखों में दो बूँद उतर आये उनकी. मेरे उस
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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अलविदा रायपुर...

अभी कुछ ही दिनों पहले तो आया था यहाँ... रायपुर... २५ दिसम्बर २००९. एक महीने से ज्यादा हो गया और पता भी न चला... दीदी और जीजाजी का अच्छा साथ जो मिला, कई नए दोस्त बने और एक रिश्ता भी... एक अनजाना रिश्ता...जब आया था तो सब कुछ नया था... शहर नया, गलियाँ,
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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वो अजनबी कौन थे...

दिनांक १८ अक्टूबर, २००७... शाम के लगभग ८ बजे.... दिल्ली के पुष्प विहार इलाके में अकेला टहल रहा था. मन उदास था और अन्दर ही अन्दर रो भइ रहा था मैं. कुछ बूँद आंसुओं के आँखों में भी थे. नौकरी छोड़ी थी उसी दिन मैंने. नौकरी छोड़ने का दुःख नहीं था बल्कि उसके लिए
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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अपने वहम, संयोग या सत्य को थोडा और आगे बढाता हूँ...

अपने वहम, संयोग या सत्य को थोडा और आगे बढाता हूँ...  मेरे पिछले पोस्ट पर "अजय कुमार जी" और "राजीव जी" ने कहा कमरा बदल लेने को... पर मैं इनकी इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता... भागना मैंने सिखा नहीं... मैं तो और उसे जानना चाहता हूँ... डरता नहीं मैं इन
 
अभिषेक प्रसाद 'अवि'
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तीन दिनों की खोज...

आज मेरे पास सुनाने को हम दोस्तों का कोई संस्मरण नहीं है. जब दोस्त ही साथ न हो तो उनकी यादों का हम क्या करेंगे? बस यही कुछ हाल मेरा भी है. हम दोस्तों की लिस्ट बहुत लम्बी थी... या यूँ कहें सारे लोग ही हमारे दोस्त थे, चाहे
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नंगे पाँव धुप में ४ किलोमीटर

पिछले पोस्ट में मैंने हम ४ दोस्तों के बारे में बताया था. वैसे हम दोस्तों की संख्या बहुत ज्यादा है. रश्मि कहती थी "आप जब जन्म लेते है तो सारे रिश्ते आपको बने-बनाए मिलते है. सिर्फ दोती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम खुद बनाते है." बस इस लिए हमने कभी
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वापस लौट आओ...

अपने पिछले पोस्ट में आप लोगों को मैंने अपने एक "पागल" दोस्त के बारे में बताया था. आज मैं आपको मेरी सबसे अच्छी दोस्त रश्मि के कुछ विचारों से अवगत कराउंगी. रश्मि हमें पटना में मिली थी. अकेली, उदास पर उन सबसे बढ़कर बहुत खुबसूरत. लेकिन उसकी खूबसूरती
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जीवन के कुछ यादगार पल...

दोस्त शिकायत करते है की मैं ब्लॉग पर कुछ लिखती क्यों नहीं. क्या करूँ एक तो समय नहीं मिलता और दूसरा कोई अच्छी रचना भी इधर बन नहीं पा रही. अपने लास्ट पोस्ट में भी मैंने अभिषेक जी की कविता लिख दी थी, अपनी लिखी कोइ अच्छी कविता मिली ही नहीं थी. आज मैं
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